21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

3 हजार करोड़ में बनेगा राजस्थान का पहला जीआइएस ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, कांकाणी केवी जीएसएस होगा अपडेट

पश्चिमी राजस्थान में बनने वाली ग्रीन एनर्जी को सेंट्रल ग्रिड तक पहुंचाने के लिए पहले गैस इंसुलेटेड स्विचगियर (जीआइएस) तकनीक पर आधारित 765 केवी जीएसएस की कवायद शुरू हो गई है। जोधपुर के समीप कांकाणी में बने 400 केवी जीएसएस को ही अपडेट कर इसे पूरा किया जाएगा।

2 min read
Google source verification
rajasthan's first GSS green corridor construction in kankani jodhpur

3 हजार करोड़ में बनेगा राजस्थान का पहला जीआइएस ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, कांकाणी केवी जीएसएस होगा अपडेट

अविनाश केवलिया/जोधपुर. पश्चिमी राजस्थान में बनने वाली ग्रीन एनर्जी को सेंट्रल ग्रिड तक पहुंचाने के लिए पहले गैस इंसुलेटेड स्विचगियर (जीआइएस) तकनीक पर आधारित 765 केवी जीएसएस की कवायद शुरू हो गई है। जोधपुर के समीप कांकाणी में बने 400 केवी जीएसएस को ही अपडेट कर इसे पूरा किया जाएगा। पिछले कुछ समय में ग्रीन एनर्जी का लोड बढऩे से इसकी बड़ी मांग थी। यह राजस्थान प्रसारण निगम लिमिटेड का प्रदेश में तीसरा 765 केवी जीएसएस होगा।

जोधपुर सहित बाड़मेर और जैसलमेर में बनने वाली ग्रीन एनर्जी फिलहाल 400 केवी की लाइनों से ही ग्रिड तक पहुंचाई जा रही है। ऐसे में इन पर लोड अधिक है। अब नई सौर ऊर्जा नीति में प्रदेश में वर्तमान में बनने वाली ग्रीन एनर्जी को अगले पांच साल में छह गुना तक बढ़ाने की योजना बनाई गई है। ऐसे में यह जीएसएस और ग्रीन कॉरिडोर काफी महत्वपूर्ण है। पहली बार 765 केवी जीएसएस में गैस इंसुलेटेड स्विचगियर तकनीक का उपयोग किया जाएगा। ऐसे में कम जगह में ही इसका निर्माण संभव होगा।

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर का महत्व
पश्चिमी राजस्थान में ग्रीन एनर्जी का दायरा काफी बड़ा है। पिछले एक दशक में इसमें 10 गुना तक वृद्धि हुई है। सोलर एनर्जी के लिए 3500 मेगावाट और विंड एनर्जी के लिए 2 हजार मेगावाट के उपकरण लगे हुए हैं। इस एनर्जी को सेंट्रल ग्रिड दिल्ली व अलवर तक पहुंचाने के लिए 765 केवी की लाइनों की आवश्यकता थी। भड़ला में स्थित प्रदेश के सबसे बड़े सोलर पार्क में निजी कंपनी की ओर से 765 केवी का जीएसएस पहले ही बना दिया गया है। ऐसे में सरकारी स्तर पर इसकी मांग लम्बे समय से की जा रही थी।

जीआइएस तकनीक
जीआइएस तकनीक हाल ही में ऊर्जा क्षेत्र में उपयोग में आने लगी है। कॉम्पेक्ट तरीके से बिजली सब स्टेशन का निर्माण कर लिया जाता है। प्रांतीय विद्युत मंडल मजदूर फेडरेशन इंटक के अध्यक्ष व प्रसारण निगम में तकनीकी विशेषज्ञ मंडल दत्त जोशी के अनुसार जोधपुर में प्रसारण निगम ने 132 केवी के कुछ जीएसएस हाल ही में इस तकनीक पर तैयार किए हैं। 765 केवी स्तर पर यह तकनीक पहली बार उपयोग में ली जाएगी।

अब 400 केवी को ही करेंगे अपग्रेड
765 केवी जीएसएस बनाने के लिए पहले लूणी तहसील के हिंगोला में जमीन चिह्नित की गई थी। इसके लिए जेडीए जमीन देने की प्रक्रिया भी शुरू कर चुका था। लेकिन इसके बाद सरकार ने वर्तमान में बने 400 केवी जीएसएस कांकाणी को ही 765 केवी में अपग्रेड करने का निर्णय किया। इससे अतिरिक्त 100 बीघा जमीन अधिग्रहण नहीं करना पड़ेगा और कुछ लाइन भी कम डालनी होगी।

फैक्ट फाइल
- 765 केवी का तीसरा जीएसएस होगा प्रदेश का
- 400 केवी जीएसएस कांकाणी को ही अपग्रेड करने की योजना
- 800 करोड़ जीएसएस निर्माण का खर्च होगा
- 3000 करोड़ लाइन डालने और कॉरिडोर पूरा करने का खर्च
- 125 बीघा जमीन की जरूरत होगी इस निर्माण में
- 5 हजार मेगावाट से ज्यादा के ग्रीन एनर्जी उपकरण लगे हैं पश्चिमी राजस्थान में

इनका कहना...
कांकाणी 400 केवी जीएसएस को ही अपग्रेड कर 765 केवी जीएसएस का निर्माण करेंगे। यह ग्रीन एनर्जी जो पश्चिमी राजस्थान में बनती है, के लिए महत्वपूर्ण होगा। जो अतिरिक्त जमीन की आवश्यकता है उसके लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
- बी.पी चौहान, मुख्य अभियंता, राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड जोधपुर

प्रदेश में पहली बार 765 केवी स्तर के जीएसएस को जीआइएस तकनीक पर बनाया जाएगा। पश्चिमी राजस्थान की ग्रीन एनर्जी को सेंट्रल कॉरिडोर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
- एम.के सोनी, अधीक्षण अभियंता, आरवीपीएनएल कांकाणी