
बजट सत्र से जोधपुर की उम्मीदें, लिफ्ट कैनाल के तीसरे चरण को मिले ‘बजट की ऊर्जा’
अविनाश केवलिया/जोधपुर. केंद्र और राज्य सरकार बजट की तैयारी में जुटी है। बजट से जोधपुर को भी काफी उम्मीदें हैं। उसकी अपनी चाहते हैं, जो वे पूरी होते देखना चाहते हैं। इससे उनकी सहूलियतें बढ़ेंगी और परेशानियां कम होंगी। बिजली और पानी जैसे आधारभूत मुद्दों का विस्तार सूर्यनगरी चाहती है। चाहे वह राजीव गांधी लिफ्ट कैनाल का तीसरा चरण हो या सोलर प्रोजेक्ट का विस्तार। सभी में केन्द्र और राज्य दोनों की भागीदारी जरूरी है।
प्रोजेक्ट 1: तीसरा चरण आए तो सालों पुरानी मांग पूरी हो
राज्य बजट में पेयजल के लिहाज से सभी को राजीव गांधी लिफ्ट कैनाल के तीसरे चरण में सकारात्मक कदम का इंतजार है। इसकी प्रशासनिक स्वीकृति बहुत पहले ही जारी हो गई थी। इस प्रोजेक्ट की लागत 1454 करोड़ रुपए है। राज्य सरकार अकेले वहन नहीं कर सकती। ऐसे में केन्द्र सरकार से स्वीकृति व एडीबी से लोन की उम्मीद है। तीसरे चरण को जोधपुर, बाड़मेर व पाली के 2014 गांवों तथा 5 कस्बों को वर्ष 2051 तक जल आपूर्ति की जा सकेगी। यदि राज्य सरकार इस संबंध में कोई घोषणा और स्वयं का अंश देने की पहल करे तो बड़ी राहत मिल सकती है।
प्रोजेक्ट 2 : राइजिंग वाटर शहर की सबसे बड़ी समस्या
इसके लिए एक प्रोजेक्ट औद्योगिक उपयोग करने के लिए बना है। इस पर काम भी चल रहा है। लेकिन यदि भूजल के इस पानी का उपयोग जोजरी रिवर फ्रंट विकसित करने में किया जाए तो राइजिंग वाटर समस्या के साथ ही प्रदूषण समस्या का भी समाधान हो सकता है। इसके लिए जोधपुर से सीवरेज के पानी व भूजल को यदि पाइप लाइन से जोजरी तक ले जाए तो आस-पास के कुएं भी इस पानी से रिचार्ज हो सकते हैं।
प्रोजेक्ट 3 : इंदिरा गांधी लिफ्ट केनाल से जोधपुर को मिलने वाले पानी की मात्रा बढ़े
कुछ माह पहले 270 क्यूसेक पानी जोधपुर के लिए लिफ्ट केनाल से छोड़ा जाना शुरू हुआ है। लेकिन गर्मियों में यह भी पूरा नहीं होता। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए 350 क्यूसेक पानी स्वीकृत है जो कि तीसरे चरण के अटकने और केनाल के कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होने से पूरा नहीं दिया जा रहा है। राज्य सरकार से उम्मीद है कि केनाल से मिलने वाले पानी की मात्रा बढ़ाई जाए।
प्रोजेक्ट 4 : सौर ऊर्जा को मिलें सम्बल
पश्चिमी राजस्थान सहित प्रदेश की पहली बार सोलर एनर्जी को बूस्टअप करना है। जोधपुर के भड़ला प्लांट जैसे यदि अन्य प्लांट जोधपुर या आस-पास के क्षेत्रों में स्थापित किए जाएं तो पूरे देश में राजस्थान सर्वाधिक सोलर एनर्जी जनरेट करने वाला प्रदेश बन सकता है। सौर ऊर्जा से न सिर्फ राजस्थान बिजली के मामले में आत्मनिर्भर बना सकता है बल्कि देश के कई हिस्सों को भी रोशन कर सकता है। वर्तमान में देश में बनने वाली 30 गीगावाट बिजली को आगामी तीन साल में 100 गीगावाट तक ले जाने का लक्ष्य है।
प्रोजेक्ट 5 : बिजली सिस्टम को चाहिए बजट
जोधपुर शहर का बिजली सिस्टम कई सालों पुराना है। पुराने शहर में घरों को छूती बिजली लाइन परेशानी का कारण है। एक बड़े बजट की आवश्यकता है जो कि जोधपुर के बिजली सिस्टम को नई दिशा दे सके। इसमें नए बिजली जीएसएस व नए ट्रंासफार्मर लग सके। जिससे वॉल सिटी में डाउन वोल्टेज की समस्या न हो। साथ ही खुले बिजली के तारों से होने वाले हादसों से बचने के लिए बिजली लाइन रिप्लेसमेंट की भी जरूरत है।
विभाग : कई प्रोजेक्ट भेजें हैं
शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सप्लाई सुदृढ़ करने के लिए कई प्रोजेक्ट भेजे हैं। राजीव गांधी लिफ्ट केनाल व एएफबी के ऋण के लिए भी प्रोजेक्ट अलग से भेज रखे हैं।
- नीरज माथुर, अतिरिक्त मुख्य अभियंता, पीएचईडी जोधपुर
एक्सपर्ट : लिफ्ट कैनाल का तीसरा चरण अहम
जोधपुर व आस-पास के क्षेत्र के लिए लिफ्ट कैनाल का तीसरा चरण ही महत्वपूर्ण है। मेरे समय में भी प्रस्ताव गया था। अब यदि स्वीकृति नहीं मिलती है तो आने-वाले कुछ वर्षों में पेयजल की स्थिति विकट होगी। इसके अलावा अतिरिक्त भूजल जो निकल रहा है उसका भी औद्योगिक उपयोग करना ही समाधान है। इस ओर भी सरकार बजट में कोई प्रावधान करे तो बेहतर है।
- डॉ. आर.के विश्नोई, सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, पीएचईडी जोधपुर
पब्लिक : पेयजल व्यवस्था ठीक हो
पिछले साल तो पानी की कमी के कारण विभाग को शटडाउन लेना पड़ा। सरकार को चाहिए कि जोधपुर में जो लिफ्ट केनाल का पानी आ रहा है उसकी मात्र बढ़ाई जाए। जिससे आने वाले सालों में पेयजल संकट न हो।
- वरुण धाणदिया, व्यापारी
Published on:
30 Jun 2019 12:33 pm
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