
waiting for kerosene
शहर में हर महीने 1 लाख लीटर से अधिक केरोसिन की हेराफेरी होती है। इससे सरकार को सीधे-सीधे 50 लाख रुपए का चूना लग रहा है। रसद विभाग के अनुसार शहर में 2.49 लाख राशनकार्ड हैं। उधर तेल कम्पनियों के अनुसार शहर में 3.75 लाख गैस कनेक्शन हैं। यानी शहर में विरला ही एेसा घर होगा, जहां गैस पर खाना न पकता हो। केरोसिन की हेराफेरी का एक प्रमाण रसद विभाग की ओर से शहर की 270 राशन की दुकानों को किया जा रहा केरोसिन का आवंटन समान है।
सीधे टैंकर ही बाजार में बेच देते हैं
शास्त्रीनगर और सरदारपुरा जैसे पॉश इलाकों के राशन डीलर्स को भी हर महीने 440 लीटर केरोसिन मिलता है और मसूरिया स्थित नट बस्ती और रातानाडा स्थित सांसी बस्ती के डीलर्स को भी 440 लीटर। सूत्रों के मुताबिक शहर में केरोसिन के अधिकतर होलसेलर राशन डीलर्स को 10 रुपए के हिसाब से केरोसिन का भुगतान कर देते हैं और सीधे टैंकर ही बाजार में बेच देते हैं।
केरोसिन का आवंटन पूरे तरीके से बंद
पूर्व जिला रसद अधिकारी महावीरसिंह राजपुरोहित ने इसे रोकने की कोशिश की और अगस्त 2015 में केरोसिन का आवंटन पूरे तरीके से बंद कर दिया था, जिसके विरोध में राशन डीलर्स एक हो गए। शहर में केरोसिन कोई नहीं लेता, इसका प्रमाण यह है कि अगस्त 2015 से लेकर दिसम्बर 2015 तक रसद विभाग में एक भी उपभोक्ता केरोसिन की डिमाण्ड लेकर नहीं पहुंचा, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते फिर से केरोसिन आवंटन शुरू करना पड़ा। तब सभी राशन डीलर्स को जनवरी 2016 से 440 लीटर समान रूप से दिया जा रहा है जिसका कोई तार्किक उत्तर रसद विभाग के पास नहीं है। यानी केरोसिन की हेराफेरी का सबको समान अवसर दिया जा रहा है।
पॉस मशीन में करते हैं फर्जी एंट्री
राशन की दुकानों पर जाने वाले केरोसिन की, खाद्य सुरक्षा में चयनित शहर के 68 हजार परिवारों के माध्यम से कालाबाजारी होती है। इन 68 हजार परिवारों को केवल गेहूं मिलता है वो भी पॉस (पॉइंट ऑफ सेल) मशीन के जरिये। सरकार ने पॉस मशीन में एक खामी यह छोड़ दी है कि इसमें एक अंगूठे के जरिये चार आइटम की एंट्री हो सकती है, बस यहीं से केरोसिन की कालाबाजारी होती है। गेंहू लेने वाला उपभोक्ता अंगूठा लगा कर अपना गेहूं ले लेता है, पीछे से राशन डीलर्स उसी के खाते में केरोसिन की भी एंट्री दिखा कर बाजार में बेच देता है। शहर के अधिकतर राशन डीलर्स यही कर रहे हैं और उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी तक नहीं है।
60 से 70 हजार लीटर केरोसिन का गबन
रसद विभाग के अधिकारी अगर ईमानदारी से काम करें तो केरोसिन की हेराफेरी से आसानी से पकड़ सकते हैं। शहर में 270 राशन डीलर्स को हर महीने 1 लाख 18 हजार लीटर केरोसिन का आवंटन हो रहा है। जबकि डीलर्स की ओर से पॉस मशीन में केरोसिन का किया गया फर्जी ट्रांजेक्शन भी देखें तो यह 40 से 50 हजार लीटर के ऊपर नहीं जाता है। यानी हर महीने 60 से 70 हजार लीटर केरोसिन की चोरी सरकारी आंकड़ों में भी हो रही है, लेकिन विभाग के अधिकारी यह जेहमत भी उठाना नहीं चाहते।
पिछले 6 महीने पॉस का केरोसिन ट्रांजेक्शन
महीना ट्रांजेक्शन (लीटर में)
मार्च 2017- 40060
फरवरी 2017- 53760
जनवरी 2017- 52700
दिसम्बर 2016-60040
नवम्बर 2016- 432600
अक्टूबर 2016- 484500
होलसेलर की दादागिरी
जिले में केरोसीन के 13 होलसेल डीलर्स हैं। इनमें से अधिकतर डीलर्स तो राशन के रिटेल डीलर्स को केरोसिन भेजते तक नहीं हैं। राशन डीलर्स खुद उनकी दुकान पर जाता है, जहां ये डीलर्स 10 से 15 रुपए प्रति लीटर केरोसिन के हिसाब से 440 लीटर केरोसिन का भुगतान कर देते हैं। राशन डीलर्स यह राशि जेब में डाल कर चलता बनता है। उधर होलसेलर डामर इण्डस्ट्री और कुछ पेट्रोल पम्पों को केरोसिन के टैंकर सीधे ही एकमुश्त बेच देता है। कुछ समय पहले एक राशन डीलर्स और होलसेलर में केरोसिन आवंटन को लेकर झगड़ा भी हो गया था, लेकिन रसद विभाग ने होलसेलर का ही पक्ष लिया। इस मामले में जिला रसद अधिकारी निर्मला मीणा से दूरभाष पर बातचीत करने की कोशिश की गई। कई बार कॉल करने के बावजूद उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
92 फीसदी परिवार के पास गैस कनेक्शन
- 7.05 लाख परिवार है जिले में
- 6.47 लाख गैस कनेक्शन हैं जिले में
- 9.27 लाख राशन कार्ड है जिले में
- 2.49 लाख राशन कार्ड है जोधपुर शहर में
- 20 हजार राशन कार्ड ही बीपीएल परिवार के शहर में
- 3.75 लाख गैस कनेक्शन हैं शहर में

बड़ी खबरें
View Allट्रेंडिंग
