
Agriculture: सोगरे के साथ भी खा सकेंगे सांभर की सहजन फली
जोधपुर. केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) की ओर से दक्षिण भारत में बहुतायात से होने वाली सहजन फली पर शोध के बाद आने वाले दिनाें में इसे शुष्क क्षेत्र का पौधा घोषित किया जा सकता है। इसकी खेती में 60 फीसदी पानी की बचत हुई है। काजरी ने 2020 में 11 और 2021 में 18 किसानाें को इसके पोड खेती के लिए दिए। वर्तमान में जोधपुर-जालोर के किसान इसे अपने खेतों में उगा रहे हैं लेकिन यहां जागरुकता कम होने से वे अहमदाबाद और मुंबई में इसे बेचकर मुनाफा कमा रहे हैं। सहजन फली 150 से 300 रुपए किलो तक मिल रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार थार में अधिक खेती होने पर सहजन फली की सब्जी बनाकर सोगरे के साथ खाई जा सकेगी। चूंकि वर्तमान में दक्षिणी भारत में इसका उत्पादन काफी अधिक होता है। वहां सांभर में इसका भरपूर मात्रा में उपयोग किया जाता है।
दूध से 10 गुना अधिक कैल्सियम
- सहजन फली सुपरफूड के अंतर्गत आती है। इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, आयरन और प्रोटीन भरपूर पाया जाता है।- दूध की तुलना में कैल्सियम दस गुना होता है। हड्डी के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद है।
- फली में 24 प्रतिशत क्रूड प्रोटीन होता है।- गाजर की तुलना में 4 गुना अधिक विटामिन ए पाया जाता है।
- संतरे की तुलना में 7 गुना ज्यादा विटामिन सी होता है।
एक हेक्टेयर से 100 क्विंटल उत्पादन
काजरी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ आरएन कुमावत ने बताया कि एक हेक्टेयर से 100 क्विंटल फली का उत्पादन होता है। बाजार में इसकी कीमत 150 से 200 रुपए तक होती है। अक्टूबर से लेकर फरवरी तक इसका मुख्य सीजन होता है। वैसे साल भर भी इसे प्राप्त कर सकते हैं। एक फली का वजन 270 ग्राम तक हो जाता है। एक पेड़ से 5 से 8 किलो फलियां ले सकते हैं। इसकी जड़े, छाल, पत्ती सभी उपयोगी है। बीपी, डायबिटीज मरीजों के लिए यह फायदेमंद है।
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सहजन फली पर अनुसंधान से बेहतरीन परिणाम सामने आए हैं। इसका आयुर्वेदिक महत्व होने के साथ किसान अच्छी आमदनी भी प्राप्त कर सकते हैं।
डॉ ओपी यादव, निदेशक, काजरी जोधपुर
Published on:
20 Jul 2022 09:35 pm
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