18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जोधपुर में रिजर्व फ ारेस्ट मात्र 4.68 वर्गकिमी

जैसलमेर में शून्य, पाली में सर्वाधिक 816.56 वर्ग किमी आरक्षित वनसंभाग के जिलों में कुल 1581 वर्ग किमी रिजर्व फॉरेस्ट

2 min read
Google source verification
जोधपुर में रिजर्व फ ारेस्ट मात्र 4.68 वर्गकिमी

जोधपुर में रिजर्व फ ारेस्ट मात्र 4.68 वर्गकिमी


जोधपुर. पर्यावरण की दृष्टि महत्वपूर्ण वन और वन्यजीवों के स्वच्छंद विचरण और संरक्षण के लिए जोधपुर संभाग में आरक्षित वन क्षेत्र कम ही बचा है। प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े शहर जोधपुर में बिलाड़ा व लूणी रेंज में क्रमश: हरयाळो जोड़ और खारी खुर्द में ही मात्र 468 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र बचा है जबकि रक्षित वन क्षेत्र 184.99 और अवर्गीकृत वन क्षेत्र 55.46 वर्ग किमी है। इसी तरह बाड़मेर जिले में 20.30 वर्ग किमी आरक्षित और 568.81 रक्षित तथा 48.10 वर्ग किमी अवर्गीकृत वनभूमि बची है। जैसलमेर में कुल वनभूमि 582.01 वर्ग किमी
है। जिनमें आरक्षित वन क्षेत्र शून्य है। जबकि रक्षित वन 239.85 तथा अवर्गीकृत वनभूमि 342.17 वर्ग किमी बची है। संभाग में पाली जिले में वनक्षेत्र की स्थिति संभाग के अन्य जिलों से बिलकुल उलट है। यहां सर्वाधिक आरक्षित वन 816.56 वर्ग किमी और रक्षित 144.82 तथा अवर्गीकृत वनक्षेत्र 2.21 वर्ग किमी है। जालौर में कुल 509.99 वनभूमि में क्रमश: 126.13 आरक्षित, 299.17 रक्षित और 83.89 प्रतिशत है। सिरोही में 614.04 आरक्षित, 985.43 रक्षित और 42.56 वर्ग किमी अवर्गीकृत वन भूमि है।
प्रदेश में कुल 3285.30 वर्ग किमी वन क्षेत्र
प्रदेश में कुल 3285.30 वर्ग किमी वन क्षेत्र है जिसमें शुष्क सागवान वन क्षेत्र 6.87, शुष्क उष्ट कटिबंधीया धौंक वन, 58.19, पतझड़ी मिश्रित वन क्षेत्र 28.42, कांटेदार वन खेत्र 6.14 और सदाबहार वन मात्र 00.38 प्रतिशत है। इनमें कुल आरक्षित वन क्षेत्र-12252.28 वर्ग किमी, रक्षित वनक्षेत्र-18494.98 वर्ग किमी तथा अवर्गीकृत वनक्षेत्र-2098.05 वर्ग किमी है।
आरक्षित वन में जनता को अधिकार नगण्य
आरक्षित वन क्षेत्र राजस्थान वन अधिनियम 1953 धारा 4 के तहत प्री नोटिफाइड होता है और फाइनल धारा 20 के तहत होता है। अवर्गीकृत वनक्षेत्र का प्री नोटिफिकेशन धारा 29 (3) के तहत होता है। फाइनल नोटिफिकेशन धारा 29 (1) के तहत होता है। फाइनल नोटिफिकेशन के बाद वनक्षेत्र में जनता के अधिकार न के बराबर होते है। इसमें वनक्षेत्र में कटान, खनन, बिजली लाइने बिछाने आदि विकास कार्य के अधिकार नगण्य होते है।