जोधपुर।
सरकारी कर्मचारियों के लिए आरजीएचएस कार्ड योजना (RGHS Scam) में करोड़ों रुपए की दवाइयों के घोटाले में पांच डॉक्टर संदेह के दायरे में है। इनकी भूमिका अब एफएसएल जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। गुजरात तबादला होने से एक महिला डॉक्टर के अभी तक सैम्पल नहीं लिए जा सके हैं। उधर, रिमाण्ड पर चल रहे एक फार्मासिस्ट और दो लाभार्थियों से पूछताछ की जा रही है।
सहायक पुलिस आयुक्त व साइबर थाना प्रभारी जयराम मुण्डेल ने बताया कि प्रकरण में पांच डॉक्टरों की संदिग्ध भूमिका है।घोटाले के संबंध में पुलिस ने आरजीएचएस कार्ड धारकों मरीजों को लिखी पर्चियां जब्त की थी। वहीं, झंवर मेडिकल एजेंसीज से कुछ मोहरें भी जब्त की गईं थी। यह पर्चियां डॉक्टरों ने ही लिखी थी अथवा नहीं, इस संबंध में एफएसएल जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगा। इसके लिए पुलिस ने चिकित्सकों की लिखावट के नमूने लिए थे। इन नमूनों व पर्चियों की हस्त लिखावट मिलाने के लिए नमूने विधि विज्ञान प्रयोगशाला एफएसएल भेजे गए हैं। इनकी जांच रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद इनकी भूमिका स्पष्ट होगी।
अब तक चार गिरफ्तार, तीन रिमाण्ड पर
पुलिस ने प्रकरण दर्ज होने के दूसरे ही दिन 27 सितम्बर को झंवर मेडिकल एजेंसीज के संचालक जुगल झंवर को गिरफ्तार किया था। गत शनिवार को समदड़ी थानान्तर्गत कर्मावास गांव निवासी नरेश मेघवाल और लाभार्थी महेन्द्र कुमार व कांकरला निवासी बगदाराम प्रजापत को गिरफ्तार किया था। जो रिमाण्ड पर है। फामासिस्ट नरेश ने आधा दर्जन से अधिक आरजीएचएस कार्ड से जुगल झंवर के मार्फत साठ लाख रुपए की दवाइयों के बिल बनाए थे। बदले में उसे दो लाख रुपए दिए गए थे।