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russia ukraine war के हमले India से गए प​क्षियों ने भी झेले और धमाके सुन लौट आए

russia ukraine war का खामियाजा इंसान ही नहीं बल्कि पक्षी भी भुगत रहे हैं। सर्दियों में India में समय बिताने के बाद वापस ठंडे प्रदेश में जाने वाले ये पक्षी Ukraine का रास्ता चुनते हैं, लेकिन इस बार धमाकों की आवाज के कारण यह नहीं हो सका।

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russia ukraine war के हमले India से गए प​क्षियों ने भी झेले और धमाके सुन लौट आए

russia ukraine war के हमले India से गए प​क्षियों ने भी झेले और धमाके सुन लौट आए

russia ukraine war के कारण March महीने का एक पखवाड़ा बीतने के बाद भी कुरजां के समूह Jodhpur के खींचन सहित मारवाड़ के विभिन्न जलाशयों पर अभी तक 20 से 25 हजार की संख्या में पड़ाव डाले हुए हैं। पक्षी विशेषज्ञों की माने तो मार्च महीने में तापमान बढऩे के बाद कभी भी कुरजां इतनी बडी संख्या में नहीं ठहरी है। आमतौर पर शीतकालीन प्रवास के बाद भारत से वापसी कर पाकिस्तान, अरब देशों से यूरोप के तुर्की व अंकारा के रास्ते यूक्रेन सीमा पर पहुंचने वाली कुरजां वहां WaR के कारण प्रतिकूल वातावरण से मारवाड़ में ही डेरा डाले है। पक्षी व्यवहार के जानकारों के अनुसार पड़ाव स्थल अथवा मार्ग में खतरा भांप लेने की क्षमता भी उनमें होती है।

यह भी कारण

- खींचन सहित पाली जिले के सरदारसमंद झील में पर्याप्त मात्रा में पानी व भोजन की व्यवस्था ठहराव का एक कारण हो सकता है।

- विलंब से हुई बारिश के कारण भी कुरजां को अभी तक यहां का मौसम अनुकूल लग रहा है।

- जहां पानी और भोजन है वहां कुरजां का ठहराव अभी कुछ दिन हो सकता है।

- जलवायु परिवर्तन के साथ कई बार कुरजां अपने बच्चों को डवलप करने के लिए भी रूक जाते है।

- हवा के साथ जब तक पक्षियों के अनुकूल वातावरण ना हो तो भी ठहराव का एक कारण हो सकता है।

अब तक 8 हजार कुरजां खींचन मेंखींचन में मार्च के प्रथम सप्ताह में अधिकतम दो हजार के करीब कुरजां का प्रवास रहता है, लेकिन इस बार यह संख्या 7 से 8 हजार के करीब है।

खींचन में कुरजां का मार्च में पड़ाव

2019.....1700

2020.....1700

2021.....2200

2022.....8000

वन्यजीव कंजर्वेशन रिजर्व की प्रबल संभावनाए

सरदारसमंद झील में शीतकालीन प्रवास के लिए आने वाली विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों एवं वन्यजीवों की बहुतायत संख्या में उपलब्धता के कारण इस क्षेत्र में वन्यजीव कंजर्वेशन रिजर्व की प्रबल संभावनाए है। इको टूरिज्म को भी फायदा होगा।डॉ हेमसिंह गहलोत, निदेशक, वाइल्ड लाइफ रिसर्च एण्ड कन्जर्वेशन अवेयरनेस सेन्टर जेएनवीयू

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