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दवाइयों पर लिखा होता है शैड्यूल एच, जानिए क्या है……

    शेड्यूल एच-1 में तीसरे-चौथे जेनरेशन की एंटीबायोटिक, एंटी ट्यूबरकुलोसिस की दवाएं

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दवाइयों पर लिखा होता है शैड्यूल एच, जानिए क्या है......

दवाइयों पर लिखा होता है शैड्यूल एच, जानिए क्या है......

जोधपुर. आमजन धड़ल्ले से दवा दुकानों से दवाइयां खरीदते हैं और बिना सोचे समझे खा लेते हैं। केमिस्ट भी बिक्री के चक्कर में कुछ नहीं बोलते, जबकि कई दवाइयां आप बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं खरीद सकते। सरकार व औषधि नियंत्रण संगठन ने आम लोगों की सुरक्षा के लिहाज से कई दवाइयों को शेड्यूल एच, शेड्यूल एच-1 व शेड्यूल एक्स जैसी श्रेणियों में रखते हुए इनकी बिक्री बिना डॉक्टर की पर्ची प्रतिबंधित कर रखी है। फिर भी ये दवाएं नाम बताते ही आसानी से मिल जाती है।

दरअसल, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत ही शेड्यूल एच दवाओं का निर्माण और उनकी बिक्री की जाती है। शेड्यूल एच की दवाओं को बिना डॉक्टरी सलाह या डॉक्टर की बिना पर्ची के नहीं खरीदा जा सकता है, क्योंकि इन दवाओं की खुराक का निर्धारण खुद डॉक्टर करते हैं। यदि आप बिना डॉक्टरी सलाह के इनका सेवन लंबे समय तक करते हैं तो स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। कभी-कभी तो जान का भी खतरा रहता है। शेड्यूल -एच में एंटीबायोटिक और हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन जैसी 500 से भी अधिक दवाएं शामिल हैं। विशेषज्ञों की मानें तो शेड्यूल एच दवाओं के लेबल पर आरएक्स और इनके इस्तेमाल को लेकर चेतावनी भी लिखी होती है। एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल को देखते हुए सरकार ने लगभग 46 दवाओं को शेड्युल एच-1 में शामिल किया है। इनकी बिक्री भी चिकित्सक की पर्ची के बिना नहीं हो सकती।

ताकि न लगे नशे की लत

विशेषज्ञ के अनुसार शेड्यूल एच-1 दवा में तीसरे और चौथे जेनेरेशन की एंटीबायोटिक्स, एंटी-ट्यूबरकुलोसिस और साइकोट्रोपिक ड्रग्स जैसी नशीली और आदत बनाने वाली दवाएं शामिल की गई हैं।

अत्यंत नशीली दवाएं शेड्यूल एक्स में

शेड्यूल एक्स में नारकोटिक और साइकोट्रोपिक दवाएं आती हैं, जो अत्यंत नशीली होती हैं। ये दवाएं सीधे दिमाग पर असर करती हैं। ऐसे में इनकी गलत खुराक या ओवरडोज घातक भी साबित हो सकती हैं। इसलिए शेड्यूल एक्स दवाएं खरीदने और उनका सेवन करने के लिए डॉक्टर की पर्ची और सलाह जरूरी है।

पर्ची पर बिल नंबर भी अंकित करें दवा दुकानदार

एक्सपर्ट कमेंट----

डॉक्टर्स की ओर से मरीज को कई बार स्टुराइड लिखी जाती है। उसकी डोज कुछ समय बाद कम की जाती है। मरीज यदि एक ही पर्ची से बार-बार महीनों तक दवा लेता रहेगा तो स्टुराइड के साइड इफैक्ट आने लगेंगे। कइयों का चेहरा बिलकुल गोल पड़ जाता है। इस कारण डॉक्टर्स के बगैर परामर्श लंबे समय तक एक ही दवाइयां न लें। वहीं मेडिकल स्टोर्स दवा दें तो पर्चे को एंड्रोस करें, बिल नंबर लिख दे। ताकि मरीज उस पर्ची से दूसरी दुकान से दवा न लें। कई बार उसमें नशे के कंटेंट होते हैं, मरीज पांच दुकानों पर जाकर एक ही दवा खरीद लेता है। इस पर भी रोक लग सकेगी। कई जने डिप्रेशन का शिकार होकर ऐसा करते हैं। कई लोग साल 2020 में लिखा परामर्श पर्चा लेकर साल 2022 तक घूमते रहते हैं। मेडिकल स्टोर्स भी नवीन पर्चे पर ही दवाइयां दे। इस बात का ध्यान रखा जाए।

- अजय फाटक, औषधि नियंत्रक, जयपुर