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जोधपुर

Screaming : चीख-चिल्लाहट और धमाके, एक महिला को छत से बचाया

- पड़ोसी मदद को भागे, लेकिन आग के शोलों के आगे सहमे- आस-पास के मकान से भागे पड़ोसी

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जोधपुर।
आग लगते ही चीखने-चिल्लाने (Screaming from explosions in cylinder) की आवाजें सुन आस-पड़ोसी मदद को बाहर निकले, लेकिन एक के बाद एक आठ धमाकों से उनके कदम ठिठक गए। मकान में चीख-चित्कार मची हुई थी। धमाकों (explosions) से क्षेत्रवासी इतना सहम गए कि कुछ लोग जैसे खड़े थे वैसे ही परिवार को साथ लेकर मकान से निकल सुरक्षित स्थान चले गए थे। एक पड़ोसी ने हिम्मत कर झुलसे लोगों को दुपहिया वाहन पर ही अस्पताल भेजा तो दूसरे ने अपनी छत से एक महिला को सुरक्षित बचा लिया।
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कपड़े फाड़ आग बुझा अस्पताल भेजा
‘दोपहर करीब सवा एक बजे बच्चों को स्कूल से लेकर भोमाराम की गली के आगे से निकलने लगा। तभी धमाके शुरू हुए। काला धुआं आसमान में देखा तो सोचा काले बादल होंगे, लेकिन और धमाके सुनाई दिए। लोग चीखने चिल्लाने लगे। बच्चों को घर छोड़ मौके पर पहुंचा। आग की लपटों से घिरा एक युवक मकान से भागते हुए बाहर आते हुए मिला। वह बुरी तरह जला हुआ था। आग बुझाई और शरीर पर बचे कपड़े फाड़कर दूर फेंके। आस-पास के लोग भी झुलस चुके थे। फिर दुपहिया वाहन व अन्य साधनों से उन्हें अस्पताल भेजा।’
चेतन, क्षेत्रवासी।
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पड़ोसी चीखने लगे, गेट पर लपटें थी तो छत पर भागे
‘दोपहर में घर पर ही था। घरवाले खाना खा रहे थे। इतने में पड़ोसी चीखने-चिल्लाने लगे। हम भागकर बाहर आए तो पड़ोसी गेट पर आग की ज्वाला नजर आ रही थी। पूरा मकान लपटों से घिरा हुआ था। मुख्य गेट पर भीषण आग होने से कोई भी बाहर नहीं आ पा रहा था। बच्चे-महिलाएं व पुरुष मकान में फंसे गए थे। वे मदद के लिए चिल्ला रहे थे। तभी सिलेण्डरों में विस्फोट होने लग गए। हम घबराकर दूर हटे। आग से बचने के लिए भोमाराम के छोटे भाई की पत्नी छत की तरफ भागी। हमारे छत का दरवाजा बजाने लगी। हम भी छत पर गए और उसे सुरक्षित निकाला।’
पारस जोशी, पड़ोसी।
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मेरे पहुंचने के बाद 4 धमाके हुए, बाहर खड़ा युवक जला
‘आग की सूचना पर सबसे पहले मौके पर पहुंचा था। उसके बाद चार विस्फोट हुए। मकान में आग ही आग थी। बाहर सिलेण्डरों से भरी पिकअप चपेट में आने का खतरा था। एक युवक की मदद से उसे हटाने का प्रयास करने लगा। इतने में मकान से आग का गोला आया और मकान के बाहर खड़ा युवक चपेट में आ गया। आंखों के सामने वह पूरा जल गया। कपड़े ही नहीं, चमड़ी तक जल गई।’
रामलाल, हेड कांस्टेबल, पुलिस स्टेशन माता का थान।