जोधपुर/फलोदी पत्रिका- उज्जैन नगरी राजा भर्तुहरि मैं तो रंग महलों में मौज करूं…., ओ तो झूठो है संसार, जोग लियो रे राजा भर्तृहरि, औरत के मत लगो सिखाएं, भाई जग में है प्यारा….. आदि मर्मस्पर्शी दोहों से फलोदी लोक कलामंच की ओर से राजा भर्तृहरि रम्मत का मंचन किया गया। जिसमें बडी संख्यां में दर्शक उमडे और रम्मत का पूरी रात रंग जमा रहा। राजा भर्तृहरि का किरदार सुनिल बोहरा ने तो रानी पिंगला का किरदार मणिशंकर गज्जा ने किया। गौरतलब है कि उज्जैन के प्रतापी राजा भृतहरि के जीवन पर आधारित इस रम्मत में राजा भर्तृहरि के रानी पिंगला के कहने पर भाई विक्रम को सन्यास देने और फिर पंडित के अमरफल का राजा को भेंट करने के बाद रानी पिंगला के चरित्र का सामने आने के बाद राजा का गुरू गोरखनाथ के सानिध्य में सन्यास लेने की मार्मिक कहानी है, जिससे हर किसी को इस संसार को झूठा बताते हुए ईश्वर आराधना करते हुए सद मार्ग पर चलने और भाई पर कभी अविश्वास नहीं रखने की कहानी है। कहानी में मृग के शिकार के बाद मृगणियों की ओर से राजा को श्राप देने और फिर राजा भर्तृहरि के सन्यास की पटकथा होने का वृतांत जीवन को झकझोर देने वाला रहा।
इन्होंने निभाए किरदार
रम्मत के दौरान सुनिल बोहरा मलार राजा भृतहरि, मणिशंकर गज्जा ने रानी पिंगला, रोशन रामचन्द्रानी राजा विक्रम, ब्रजमेाहन व्यास गुरू गोरख, गोपाल बोहरा कोचवान व बेटी का, नटवर थानवी ने चाचक बोहरा व ब्राह्मण, जीनेश हुडिया ने हलाकारा व दीवान, दीनदयाल व्यास ने बडी रानी व वैश्या, सुनिल व्यास ने दासी, हनुमान ओझा ने मृग का किरदान निभाकर समा बांध दिया। रम्मत का मंचन भूरदास थानवी, जसराज पुरोहित, दीनदयाल व्यास, अशोक बोहरा, बृजमोहन व्यास, बबलू जोशी, जेपी गुचिया ने किया। जितेन्द्र कुमार व्यास उद्घोषक रहे।