
Nagar Parishad Big Action: नगर परिषद क्षेत्र में कृषि मंडी के पास हाइवे पर मास्टर प्लान के विपरित बिना व्यावसायिक पट्टों व निर्माण स्वीकृति के बनी दुकानों को सीज किया गया। नगर परिषद की टीम ने अवैध तरीके से बनाई गई 88 दुकानों को सीज कर नोटिस चस्पा किए गए हैं। नगर परिषद ने इस तरह एक साथ 88 दुकानें पहली बार सीज की है। उल्लेखनीय है कि दुकानों का निर्माण कार्य करीब एक साल से चल रहा था, जो अब पूरा हो चुका था। पहले नगर परिषद ने दुकान मालिकों को नोटिस जारी किए गए थे।
नगर परिषद क्षेत्र में मास्टर प्लान के तहत आरक्षित आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों के लिए बोर्ड से स्वीकृति के बाद सरकार से अनुमति लेना आवश्यक है। साथ ही इसमें गजट नोटिफिकेशन जारी होता है। जबकि यहां नियमों को अनदेखा कर जमीन मालिक ने 17 व्यक्तियों के नाम 28 व्यवसायिक पट्टे लिए। फिर 88 दुकानों का निर्माण कर लिया है। पट्टों का विभाजन भी नहीं हुआ है।
चार माह पूर्व यह मामला जब जिला कलक्टर टीना डाबी के पास पहुंचा तो उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों ने पालिका अधिनियम की धारा 194 के तहत नोटिस देकर बचाव किया और जिला कलक्टर को तर्क दिया कि सीज की कार्रवाई से नगर परिषद को राजस्व नहीं मिलेगा, इसलिए नियमितिकरण किया जाएं। लेकिन चार माह जांच पड़ताल के बावजूद भी नगर परिषद नियमों के तहत नियमितिकरण नहीं हुआ तो अब आनन-फानन में दुकानों को सीज किया गया है।
बिना भवन निर्माण की स्वीकृति ही बड़ा मार्केट तैयार कर लिया गया। इतना ही नहीं इसमें न तो सेट बैक छोड़ा गया है और न ही पार्किंग के लिए कोई जगह है। भवन निर्माण नियमों के तहत अगर अब नगर परिषद स्वीकृति जारी करती है तो एक दुकान से करीब 7 लाख रुपए का राजस्व मिलेगा। जबकि सेट बैक नहीं होने की स्थिति में स्वीकृति नहीं मिल सकती है।
राजस्थान पत्रिका ने 15 जनवरी के अंक में मास्टर प्लान में आवासीय…पहले 28 व्यवसायिक पट्टे , अब गैर इजाजत 88 निर्माण शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर मामला उजगार किया और आयुक्त से सवाल-जवाब किए थे। इसके बाद जांच प्रक्रिया शुरू हुई और अब नगर परिषद की टीम ने 88 दुकानों को सीज कर दिया है।
Published on:
07 Apr 2025 11:40 am
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