
जयकुमार भाटी, जोधपुर। जीवन में कई बार हमारे परिजन जो सोचते हैं, वह नहीं होता। कुछ और ही हो जाता है। ऐसा ही कुछ हुआ जोधपुर की मुस्कान विश्नोई के साथ। वकील पिता और नर्स मां का सपना था कि बेटी आगे जाकर डॉक्टर बने, लेकिन यह किसे पता था कि डॉक्टर बनने की राह पर चलने वाली मुस्कान आगे जाकर बॉक्सर बन जाएंगी। बॉक्सिंग के लिए परिवार का विरोध झेलना पड़ा, लेकिन लक्ष्य नहीं छोड़ा और अपनी मेहनत व पंच के दम पर नेशनल बॉक्सर बन गईं।
जब देखी बॉक्सिंग, तब दिखा सपना
मुस्कान ने बताया, बचपन से मेरे पिता चाहते थे कि मैं डॉक्टर बनूं और लोगों की सेवा करूं। मैंने भी उनके सपनों को पूरा करने के लिए साइंस में रुचि लेना शुरू कर दिया, लेकिन पिता के सपने को पूरा करने की राह पर चलते हुए मुझे खुद का सपना दिखाई दिया। ऐसा उस समय हुआ जब एक दिन पिता के साथ शहर में आयोजित बॉक्सिंग प्रतियोगिता देखने गई। वहां लड़कियों को बॉक्सिंग करते देख मैंने भी सीखने की ठानी। इसके बाद बॉक्सिंग सीखना शुरू किया।
मेरा सपना है देश के लिए गोल्ड लाना
मेरा सपना अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के लिए गोल्ड लाने का है। मेरी जिद पक्की है। उन दिनों महिला बॉक्सर अर्शी खानम अंतरराष्ट्रीय मेडल जीतकर लौटी थीं, जिनका सम्मान होते देख मैंने भी पदक जीतने का लक्ष्य बनाया। इसके बाद राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक जीता। मेरा अभ्यास लगातार जारी है।
Published on:
02 Jul 2023 12:12 pm
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