
World Spine Day: पहली बार पेट के रास्ते कमर दर्द की सर्जरी
जोधपुर. डॉ सम्पूर्णानन्द मेडिकल कॉलेज के अधीन महात्मा गांधी अस्पताल में हाल ही में कमर दर्द (स्लिप डिस्क) से परेशान मरीज की सर्जरी के लिए ऑलिफ तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिसमें मरीज के पेट से रास्ते सर्जरी की गई। इसका फायदा यह है कि इसमें हड्डी व मांस काटने की जरुरत नहीं पड़ती है। ऑस्टियोपोरोसिस से परेशान मरीज को फायदा होता है। पेट के रास्ते सर्जरी करने पर फ्यूजन रेट अधिक होती है जिससे सर्जरी के बेहतर परिणाम मिलते हैं। पश्चिमी राजस्थान में यह पहली बार की गई है।
यह है ऑलिफ तकनीक
सामान्य तकनीक में कमर या पीठ पर चीरा लगाकर रीढ़ की हड्डी के आसपास की मांसपेशियों व हड्डी को काटकर दबी हुई नस तक पहुंचा जाता है और उसके बाद नस से दबाव हटाया जाता है। इसमें मांसपेशियों के कमज़ोर होने, नस के प्रभावित होने का ख़तरा रहता है लेकिन ऑलिफ़ तकनीक (ओब्लीक लम्बर इंटरबोडी फ्यूज़न ) में पेट पर सूक्ष्म छेद से ट्यूब रिट्रेक्टर औज़ार के जरिए ऑपरेशन होता है। इसमें पेट से रेट्रोपेरिटोनियल कोरिडोर होते हुए ***** तक पहुंचते हैं। ऑपरेशन में रक्त स्राव बहुत ही कम होता है। यह सर्जरी स्पाइन सर्जन डॉ महेंद्र सिंह टाक ने की है। अिस्थ रोग विभागाध्यक्ष डॉ किशोर रायचंदानी और वरिष्ठ आचार्य डॉ महेश भाटी ने बताया कि रीढ़ की हड्डी कि कुछ बीमारियों जैसे व्यस्क स्कॉलियोसिस , ऑस्टियोपोरोसिस , रिवीजन स्पाइन सर्जरी , फ़ोरमिनल स्टेनोसिस ज़ैसे मरीज़ो के लिए इस तकनीक से अद्भुत परिणाम मिलते हैं।
60 फीसदी मरीज है महिलाएं
गांधी अस्पताल में ऑर्थेापेडिक ओपीडी में आने वाले कमर दर्द के मरीजों में 60 फीसदी महिलाएं होती है। मोटापा, अनियमित डाइट जैसी समस्याओं से उन्हें कमर दर्द की शिकायत ज्यादा रहती है।
30 फीसदी गर्दन में स्लिप ***** के मरीज
गांधी अस्पताल में स्पाइन के मरीजों में 70 फीसदी कमर में स्लिप ***** के होते हैं जबकि 30 प्रतिशत गर्दन में स्लिप ***** के मरीज होते हैं। गर्दन में भी आगे के रास्ते से भोजन व सांस नली हटाकर सर्जरी की जाती है।
मजदूरों में स्लिप ***** की समस्या घटी
भारी सामान उठाने के लिए अब बड़ी-बड़ी मशीनें आने की वजह से अब स्लिक ***** से परेशान मजदूराें की संख्या में कमी आई है।
विश्व स्पाइन दिवस आज
विश्व स्पाइन दिवस हर साल 16 अक्टूबर को मनाया जाता है। लोगों में रीढ़ की हड्डी की देखभाल करने, सक्रिय बने रहने, शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देना, बेहतर शारीरिक मुद्रा, ढंग से उठना-बैठना और स्वस्थ कामकाजी परिस्थितियाें के उद्देश्य को लेकर मनाया जाता है।
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ऑलिफ तकनीक से बेहतर परिणाम मिलते हैं। वैसे स्पाइन सर्जरी भी काफी विकसित हो गई है। अब मरीजों को 24 घंटे में छुट्टी दे दी जाती है।
डॉ महेंद्र सिंह टाक, स्पाइन सर्जन, डॉ सम्पूर्णानंद मेडिकल कॉलेज जोधपुर
Published on:
16 Oct 2023 08:00 am
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