
जेडीए अधिकारियों की मनमानी पर ब्रेक, विज्ञापन गेंट्रीज का टेंडर निरस्त
जोधपुर. विज्ञापन गेंट्रीज के टेंडर में जेडीए अधिकारियों की मनमानी के खेल पर सोमवार को ब्रेक लग गया है। राजस्थान पत्रिका ने जेडीए अधिकारियों के मनमाने खेल को उजागर किया। इसके बाद चहेती फर्म को उपकृत करने वाला टेंडर सोमवार को निरस्त कर दिया गया। विज्ञापन गेंट्रीज का टेंडर अब नए सिरे से होगा।
गौरतलब है कि जोधपुर शहर में विज्ञापन गेंट्रीज के लिए बीस साल पूर्व एक फर्म से अनुबंध किया गया था। इसकी अवधि पिछले साल सितम्बर माह में पूरी हो गई। अनुबंध खत्म होने के चार माह बाद जेडीए अधिकारियों ने विज्ञापन गेंट्रीज के लिए निविदाएं आमंत्रित की। इसमें चहेती फर्म को उपकृत करने के लिए ऐसी बंदीशें लगाई कि विज्ञापन एजेंसी का काम करने वाली अधिकांश कंपनियां निविदा से बाहर हो रही थीं। यहां तक कि निविदा के लिए ए और डबल ए क्लास का लाइसेंस अनिवार्य करने की भी शर्त जोड़ दी, जबकि यह लाइसेंस निर्माण कार्य के लिए जरूरी होता है। जेडीए अधिकारियों के इस मनमाने खेल का विज्ञापन एजेंसियों ने विरोध किया और आपत्तियां दर्ज कराई। इसके बावजूद उनकी कान पर जूं तक रेंगी। पत्रिका ने पूरे गड़बड़झाले का खुलासा किया तो अब टेंडर निरस्त किया गया है।
जेडीए को पहुंचा रहे थे नुकसान
जेडीए अधिकारियों को निविदा की गड़बडि़यों से अवगत कराने के बाद भी वे चहेती फर्म को फायदा पहुंचाने पर आमादा थे। वे महीनों से जेडीए को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे थे। हैरत की बात यह है कि पुरानी फर्म की निविदा अनुबंध खत्म होने के बाद भी उसे विज्ञापन डिस्प्ले करने से नहीं रोका गया। इससे हर माह जेडीए को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा।
अब भी सवाल मांगते जवाब
- फर्म का अनुबंध खत्म होने के बाद भी गेंट्रीज पर विज्ञापन डिस्प्ले किसकी अनुमति से किए जा रहे हैं।
-विज्ञापन डिस्प्ले करने वाली फर्म के खिलाफ जेडीए कार्रवाई करने में क्यों पीछे हट रहा है।-निविदा की गड़बडि़यों से अवगत कराने के बाद भी जेडीए ने टेंडर निरस्त करने में देरी क्यों की।
-जेडीए अधिकारी विज्ञापन एजेंसियों की शिकायतों को अनसुनी क्यों करते रहे।
Published on:
28 Feb 2023 04:32 pm
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