
बासनी(जोधपुर).
शहर के चारों तरफ हर तीन साल में एक बार भोगिशैल परिक्रमा होती है, लेकिन शहर के चारों तरफ एक नाम के 16 गांवों की परिक्रमा भी लगती है। तीन अक्षरों का नाम बासनी दिखने में बहुत ही साधारण लगता है, लेकिन इसके पीछे के मर्म को समझने पर आप स्वत: ही इसमें घुलमिल जाएंगे। वाकई तीन अक्षरों का यह नाम बहुत पॉवरफु ल है। जोधपुर जिले में 16 गांव ऐसे हैं, जिनके नाम के आगे या पीछे बासनी शब्द जुड़ा हुआ है, जो मारवाड़ी समाज की समानता को शब्दों के माध्यम से बयां करता है। गांव में प्रवेश करते ही वहां के भाइचारे और बंधुत्व की भावना का परिचय नाम से ही मिल जाता है। इस मिसाल का परचम ऐसा बढ़ा कि ये कारंवा 16 गांवों तक जाकर रूका।
बासनी शब्द वास या बास से बना है। इसका मतलब यह है कि जहां लोगों के एक समूह या एक निश्चित संख्या में विशेष जातीय व धार्मिक पहचान के लोग एक साथ रहते हैं उसे वास कहते हैं। ऐसा नहीं है कि इन नामों वाले गांव में एक ही जाति या धर्म के लोग रहते हों, यहां एक साथ कई जातियों और धर्मों के लोग भी होते हैं। राजस्थान के कई शहरों में ये पारंपरिक रूप से प्रचलित व्यवस्था है जो कई सदियों से चली आ रही है। जिसका निर्वाह अब भी लोग कर रहे हैं। बासनी नाम से जोधपुर शहर के आसपास ज्यादा गांव बसे हुए हैं। इसमें से कई तो निगम की शहरी सीमा में आ गए हैं, जहां अब स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आए हुए लोग एक साथ रहते हैं जो मिलीजुली संस्कृति को प्रस्तुत करते हैं। इन 16 में से आधे से ज्यादा गांव जेडीए के अधिकार क्षेत्र में आ चुके हैं।
बासनियों में हो रहा शहर का विस्तार
जोधपुर के लूणी विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 8 बासनियां है। इसमें अकेले मण्डोर पंचायत समिति में कुल 5 बासनियां है जो शहर की सीमा में ही आती है। माता का थान स्थित बासनी तंबोलिया में तो जेडीए ने विस्तार करते हुए कॉलोनी भी काटी है। जिसकी तर्ज पर अन्य कई बासनियों में भी जेडीए और निगम का विस्तार करने का प्लान है। इसी तरह लूणी ब्लॉक में तीन बासनियां हैं। जहां भी जेडीए का अधिकार क्षेत्र लगता है। यहां भी भविष्य में टाऊनशिप प्लानिंग अपना मूर्त रूप लेगी। ये जगह शहर की बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए फलीभूत हो रहा है।
यहां बना बासनी औद्योगिक क्षेत्र
्रजोधपुर शहर के दक्षिणी जोन पाली रोड से जुड़ी बासनी जिले की सभी बासनियों से सबसे ज्यादा समृद्ध है। जहां लोगों की जनसंख्या इतनी तेजी से बढी की यहां स्थानीय से ज्यादा यूपी, बिहार, प.बंगाल सहित अन्य प्रदेशों के लोगों की संख्या हो गई है। यहां बासनी प्रथम फेज और द्वितीय फेज के नाम से दो क्षेत्र हैं। दोनों में ही रहवासीय और औद्योगिक क्षेत्र साथ साथ लगते हैं। ये बासनी मूल रूप से मेघवालों और कुम्हारों की बस्ती के रूप में जानी जाती थी। धीरे धीरे यहां शहर से आकर परिवार बसे और इस बासनी की जनसंख्या 2 लाख से ऊपर है और यहां फैले औद्योगिक क्षेत्र में करीब 3 हजार औद्योगिक इकाइयां है।
इतिहास में कहीं जिक्र नहीं
शहर के पास लूणी विधानसभा क्षेत्र में चार बासनियां आती है। जानकार लोग बताते हैं कि इस संबंध में कोई अधिकृत इतिहास नहीं है। बड़े बुजुर्गों से सुनकर इस बारे में जानकारी मिलती है। बासनी झूठा का नाम झूठा नाम के व्यक्ति पर पड़ा हुआ है। उसने सबसे पहले अपनी ढाणी बनाई। उसके बाद यहां गांव बस गया। जिसका नाम पड़ा बासनी झूठा। यहां जाट और पटेल समाज के परिवार रहते हैं। इसी तरह बोरानाडा के पास आजादी से पहले सिलावटां गोत्र के मुस्लिम जागीरदार की जागीर थी। उसी के नाम पर इस गांव का नाम बासनी सिलावटां पड़ा। यहां पटेल, राव, मेघवाल, मुस्लिम सहित कई जातियों के परिवार एक साथ रहते हैं। इसी प्रकार बासनी मनणा में राजपुरोहित समाज के परिवार बहुतायत हैं। वहीं बासनी सेफाऊ में राजपूत, राजपुरोहित सहित 36 कौम के लोग एक साथ रहते हैं। इस गांव से लूणी विधानसभा क्षेत्र का बूथ नंबर-1 शुरू होता है।
ये भी है बासनियां
भोपालगढ़ तहसील में बासनी हरिसिंह, ओसियां में बड़ला बासनी, लूणी तहसील में बासनी बाघेला, बासनी चारणान, बासनी झूनथण, बिलाड़ा में बासनी कापरड़ा, मण्डोर में बासनी बेंदा, बासनी लाछां, बासनी निकूंबा, बासनी सेफाऊ, बासनी करवड़, ओसियां तहसील में बासनी भाटियान, लूणी में बासनी तंबोलिया, बासनी सिलावटां, बासनी मनणा।
Published on:
06 Nov 2017 03:02 pm
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