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Indian Army day: भिण्डरावाले को मारने वाले निर्भय सिंह की कम्पनी को मिले हैं 3 अशोक चक्र, आर्मी की एकमात्र कम्पनी है

- आर्मी की 15 कुमाऊ बटालियन की एल्फा कम्पनी अब कहलाती है अशोक चक्र कम्पनी, राजस्थान के सैनिक कल्याण निदेशक ब्रिगेडियर राठौड़ भी रह चुके हैं कम्पनी कम्पाडर- झालावाड़ के रहने वाले थे निर्भय सिंह, उनके पीछे स्टेनगन लेकर स्वर्ण मंदिर में घुसे थे जोधपुर के नायक अमरसिंह

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Indian Army day: भिण्डरावाले को मारने वाले निर्भय सिंह की कम्पनी को मिले हैं 3 अशोक चक्र, आर्मी की एकमात्र कम्पनी है

Indian Army day: भिण्डरावाले को मारने वाले निर्भय सिंह की कम्पनी को मिले हैं 3 अशोक चक्र, आर्मी की एकमात्र कम्पनी है

जोधपुर. स्वर्णमंदिर को खालिस्तानियों से मुक्ति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले भारतीय सेना की 15 कुमाऊ बटालियन की एल्फा कम्पनी देश की एकमात्र ऐसी कम्पनी है जिसने 3 अशोक चक्र जीते हैं। इसके बाद इसका नाम अशोक चक्र कम्पनी रख दिया गया। दो अशोक चक्र स्वर्णमंदिर को खाली करवाने के लिए सेना की ओर से चलाए गए ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान मिले। एल्फा कम्पनी की प्रथम यूनिट के नायक निर्भय सिंह सिसोदिया और कम्पनी कमाण्डर मेजर बीके मिश्रा को अशोक चक्र मिला। एल्फा कम्पनी द्वितीय यूनिट के ही नायक रामधीर को 13-राष्ट्रीय राइफल के ऑपरेशन में योगदान के लिए अशोक चक्र से नवाजा गया। अशोक चक्र शांतिकाल में देश का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है।

भिण्डरावाले को मार गिराया निर्भय सिंह ने
ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय जब आर्मी की ब्रिगेड ऑफ द गार्ड और गढ़वाल कम्पनी के सैनिक अधिक शहीद हो गए तो 15 कुमाऊ को आगे भेजा गया। 6 जून 1984 को 15 कुमाऊ की एल्फा बटालियन की प्रथम यूनिट के पांच सिपाही सुबह 5.30 स्वर्ण मंदिर में घुसने लगे। आतंकवादी ऊपर से गोलियां बरसा रहे थे। सबसे आगे चल रहे झुंझनूं निवासी रंजीत सिंह सबसे पहले शहीद हुए। उन्हें बाद में शौर्य चक्र मिला। दूसरे और तीसरे नम्बर के जवानों ने ओट ले ली। एलएमजी के साथ झालरापाटन के नायक निर्भय सिंह चौथे नम्बर और स्टेन गन के साथ जोधपुर के अमरङ्क्षसह भाटी पांचवें नम्बर पर चल रहे थे। गोलियों की परवाह नहीं करते हुए निर्भय आगे बढ़े लेकिन गोलियों की बौछारों ने उनका दाहिना बाजू उड़ा दिया तब तक वे तहखाने के पास पहुंच गए और दूसरे हाथ से ग्रेनड फैंका, जिससे वहां धुंआ हो गए। अमरसिंह ने भी 2 ग्रेनेड फैंके। धुंए की आड़ में निर्भय ने एक हाथ से ही एलएमजी से फायर शुरू किए और भिण्डरावाले सहित कई आतंकवादी मारे गए। इस बीच सेना की टैंक का एक गोला स्वर्णमंदिर की छत पर लगा। वहां से मलबा गिरने से निर्भयसिंह की दबकर मौत हो गई। इसके बाद तहखाने से भी फायरिंग बंद हो गई और भारतीय सेना ने स्वर्णमंदिर पर पूरा कब्जा कर लिया। रात 9 बजे ऑपरेशन खत्म हो गया।

नौ साल बाद 300 साल की हो जाएगी 15-कुमाऊ
इंदौर के महाराजा होल्कर ने 5 नवम्बर 1730 को इंदौर इंफैंट्री बनाई थी। आजादी के बाद इसका नाम 15-कुमाऊ हो गया। वर्ष 2030 में कम्पनी 300 वर्ष पूरे कर लेगी। राजस्थान में सैनिक कल्याण के वर्तमान निदेशक ब्रिगेडियर वीरेंद्र सिंह राठौड़ ने ऑपरेशन ब्लू स्टार खत्म होने के कुछ दिन बाद ही कम्पनी जॉइन की। वे बाद में कम्पनी कमाण्डर भी बने।
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मुझे केवल छर्रे लगे थे
निर्भय सिंह के पीछे मैं था। सौभाग्य से मुझे केवल छर्रे लगे थे। मैंने निर्भय सिंह के साथ मिलकर तहखाने से फायरिंग पूरी तरीके से बंद करवा दी। ऊपर से मलबा गिरने के बाद मैंने दूसरी जगह मोर्चा संभाला।
- अमरसिंह भाटी, (तत्कालीन नायक, 15-कुमाऊ बटालियन) जोधपुर

केवल एल्फा कम्पनी को मिले हैं अशोक चक्र
सेना की 15-कुमाऊ की एल्फा कम्पनी देश की एकमात्र ऐसी कम्पनी है जिसको तीन अशोक चक्र मिले हैं। मैंने भी कम्पनी को कमाण्ड किया था।
- ब्रिगेडियर वीरेंद्र सिंह राठौड़, निदेशक (सैनिक कल्याण), राजस्थान