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बिलाड़ा रास रेलवे लाइन जुड़ने पर होगा औद्योगिक कायाकल्प , 58 किमी घटेगी दूरी…..देखें वीडियो

बिलाड़ा से रास के बीच 45 किलोमीटर रेलवे लाइन बिछने पर, ब्यावर से जोधपुर तक 58 किमी घट जाएगी दूरी खनिजों से भरपूर समृद्ध क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा रेल मार्ग, देश से जुड़ जाएगा बिलाड़ा

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जोधपुर /बिलाड़ा. उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य रेल अधीक्षक की ओर से जयपुर एवं केंद्र के रेल मंत्रालय को बिलाड़ा- जैतारण- रास होते हुए ब्यावर रेलखंड से जोडऩे के लिए की गई सिफारिश अब व्यवहारिक रूप लेते नजर आने लगी है। अब तक के किए गए सर्वे के अनुसार बिलाड़ा से रास मात्र 45 किलोमीटर की दूरी में रेलखंड बिछाने से बिलाड़ा देशभर से जुड़ सकेगा। वर्तमान में ब्यावर से मारवाड़ जंक्शन होते हुए रेल जोधपुर तक पहुंचने के दौरान 191 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ रहा है जबकि अब ब्यावर, रास जैतारण बिलाड़ा होते हुए सीधे जोधपुर मात्र 133 किलोमीटर की दूरी तय कर पहुंचा जा सकेगा। इस प्रकार 58 किलोमीटर की दूरी के साथ साथ करीब एक घण्टे का सफर समय कम होगा।

जनप्रतिनिधियों के प्रयास लाने लगे रंग

दशको से बिलाड़ा- बर रेल खंड विस्तार के लिए क्षेत्र के सभी प्रतिनिधि लोकसभा में, राज्यसभा में तथा व्यक्तिगत रेल मंत्रालय और रेल मंत्री से मिलकर प्रयास करते रहे हैं।

इसके लिए आंदोलन भी हुए बावजूद हर बजट में इस रेलखंड के लिए सिर्फ सर्वे के लिए थोड़ी राशि मिल जाती थी और फिर हर बार रेल मंत्रालय से यही जवाब आता कि इस रेलखंड पर रेल लाइन बिछाना महंगा सौदा है। इस बार सांसद पीपी चौधरी, सांसद दीया कुमारी, राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत, पूर्व में राज्यसभा सांसद रहे रामनारायण डूडी एवं बद्रीराम जाखड़ की ओर से अब तक के किए प्रयास रंग लाए और क्षेत्र में लग चुके सीमेंट प्लांट से अधिक से अधिक लदान मिलने के वायदे के साथ नया सर्वे करवाया गया। जिसमें बिलाड़ा रेलखंड को जैतारण, निंबोल, टुकड़ा होते हुए रास से जोड़ा जाना तय हुआ। यह दूरी मात्र 45 किलोमीटर ही है। रास पहले से ब्यावर तक रेल मार्ग से जुड़ा हुआ है। इसलिए रेल मंत्रालय को भी वित्तीय स्वीकृति के लिए ज्यादा विचार नही करना होगा।

सीमेंट और औद्योगिक विकास में लाभकारी

डीआरएम ने रेल मंत्रालय को भेजी रिपोर्ट में पहले ही कह दिया है कि रेलवे और देश के विकास के लिए इस रेलखंड का जुडऩा लाभकारी ही नहीं क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा। भेजी गई रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि यह क्षेत्र लाइमस्टोन, चाइना क्ले और ग्रेनाइट जैसे खनिजों से भरपूर समृद्ध है। ऐसे में यहां विशाल सीमेंट उद्योग स्थापित हो चुके हैं और नए उद्योग भी लग रहे हैं। यह सीमेंट उद्योग भी इस रेलखंड की मांग कर चुके हैं क्योंकि उन्हें अपने उत्पाद को विभिन्न स्थानों पर पहुंचाने के लिए मालवाहक रेक की आवश्यकता है। रेल मंत्रालय को विस्तृत जानकारी देते हुए कहा गया है कि एक रेक प्रतिदिन सीमेंट लोडिंग का भार अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट द्वारा, और निंबोल के पास स्थित निर्मेक्ष प्लांट को भी हर रोज सीमेंट की लोडिंग के लिए एक रेक की आवश्यकता है। इस प्रकार अल्ट्राट्रेक की तरह बांगड़ जैसी अन्य कई बड़ी कंपनियों को लाइमस्टोन,चूना पत्थर, चाइना क्ले के लिए इस रेलखंड की आवश्यकता है।

113 वर्ष बाद आगे बढ़ेगा यह रेल खण्ड

रेल मंत्रालय अपने विभाग की अनुशंसा को गंभीरता से लेते हुए इस वित्तीय वर्ष से रेलखंड का विस्तार करें तो यह कहा जा सकता है कि बिलाड़ा तक आए इस रेलखंड का विस्तार 113 वर्ष बाद होगा। जोधपुर रेलवे के संस्थापक जसवंत सिंह (द्वितीय) ने 18 जनवरी 1950 में पीपाडऱोड से बिलाड़ा को जोडऩे के लिए 25 मील लंबी नैरोगेज डालने का निर्णय किया। इसमें से 19 मील पीपाड़ रोड- भावी हाल्ट लाइन 11 नवंबर 1910 को तथा भावी बिलाड़ा 6 मील लाइन 1 मार्च 1993 को शुरू कर दी गई। इस पूरे रेलखंड को नैरो गेज से मीटर गेज में 1928 में बदल दिया गया। इसे 1997 में फिर उखाड़ दिया गया। 2001-02 में तत्कालीन सांसद जसवंतसिंह बिश्नोई ने अपने प्रयास से आमान परिवर्तन के लिए भूमि पूजन कराया और वर्ष 2008 में इसे ब्रॉडगेज में परिवर्तन कर दिया गया।