
पेट में जाकर कीड़े मारने की दवा खुद ही आसानी से गल नहीं रही
जोधपुर. दवा के कारोबार में भी गड़बड़ की आशंका है। औषधि नियंत्रण संगठन विभाग की लैब में दो कंपनियों की 18 बैच की एल्बेंडाजॉल गोलियां जांच में अमानक निकली हैं। इस प्रकार तीन एंटीबायोटिक समेत कुल 21 दवाइयां जांच में अमानक करार दी गई हैं।
हिमाचल प्रदेश सोलन की मैसर्स इंड स्विफ्ट कंपनी की चेवेबल एल्बेंडाजॉल ( बैच नं. बीएजेडएल-१३८ व १३९), मैसर्स ओवरसीस हैल्थ केयर की एल्बेंडाजॉल ४०० एमजी ( बैच नंबर एएलबी-०१ से लेकर १६ ) तक के नंबर जांच में अमानक निकले हैं। ये गोलियां पेट में जाकर आसानी से घुल भी नहीं है। इन सभी की एक्सपायर्ड तिथि जून-जुलाई २०२१ है। इसी प्रकार हिप्रा के बड्डी की कंपनी वीएडीएसपी फार्मास्यूटिकल्स की एंटीबायोटिक दवा सेफिक्जिम एंड पोटेशियम क्लेवुनेट टेबलेट ( ब्रांड नाम-सेफप्राइड-सीवी, बैच नं. सीएफडी-०४, सितंबर २०२०), उत्तराखंड रूडकी की सनाइवा ड्रग्स एंड फॉमूर्लेशन कंपनी की ओंडनसेट्रॉन ओरली ४ एमजी ( ब्रांड नाम-ब्लूडन-४एमडी, बैच नं. एसटी-८११०१०, अक्टूबर २०२०) और हिप्रा सोलन की मैसर्स जीएनबी मेडिका लैब की सेफोडॉक्सिम प्रोक्सिटील डिसप्रीसिबल टेबलेट १०० एमजी ( ब्रांड नाम- सिफोमैक्स-१००, बैच नं. टीए१९-२२, दिसंबर २०२०) को जांच में अमानक करार दिया गया है। इन दवाइयों में भी कइयों में घुलने की समस्या तो कइयों में सॉल्ट शून्य करार दिया गया है। इन दवाइयों के अमानक करार दिए जाने के बाद सभी सहायक औषधि नियंत्रक व औषधि नियंत्रण अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है।
नकली दवाइयां भी जयपुर-जोधपुर से पहुंचती अन्य जिलों में
प्रदेश में जयपुर-जोधपुर नकली दवाइयों के सप्लाई के गढ़ भी माने जाते हैं। यहां से दवाइयां शहर के अन्य छोटे जिले व गांव-ढाणियों में पहुंचती है। हालांकि इन मामलों की जानकारी के बावजूद भी औषधि नियंत्रण अधिकारी कई नियम कायदे ताक पर रखकर आंखें मूंदे बैठे हैं। कई जने जैनरिक दवाइयों की आड़ में सॉल्ट कम डालकर दवाइयां बाजार में बेच रहे हैं। डीसीओ को कई प्रकार की अनियमितताओं की जानकारी है, लेकिन जोधपुर में कार्रवाई की रफ्तार भी धीमी चलती है। गांवों की कई दुकानों पर नशीली दवाइयां नियम ताक पर रखकर बेची जा रही हैं।
Published on:
25 Sept 2020 10:20 am
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