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Chamunda Mata Mandir : 960 साल प्राचीन है बालेसर मां चामुंडा माता का मंदिर,….जानें पूरी जानकारी

इंदावटी क्षेत्र का सबसे बड़ा आस्था का स्थल

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Chamunda Mata Mandir : 960 साल प्राचीन है बालेसर मां चामुंडा माता का मंदिर,....जानें पूरी जानकारी

Chamunda Mata Mandir : 960 साल प्राचीन है बालेसर मां चामुंडा माता का मंदिर,....जानें पूरी जानकारी

जोधपुर. जिले के बालेसर कस्बे में 960 साल प्राचीन मां चामुंडा माता का मंदिर 36 कौम के श्रद्धालुओं का प्रमुख आस्था का केन्द्र है जहां सदियों से अखंड दिव्य ज्योत प्रज्ज्वलित है। शारदीय व चैत्रीय नवरात्र में क्षेत्र ही नहीं जोधपुर जिले एवं प्रदेश के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए देवी के दरबार में शीश नवाने पहुंचते है। मंदिर का इतिहास भी सदियों पुराना है । मां चामुण्डा की मूर्ति चमत्कारिक रूप आकाशी गर्जना के साथ स्वत: ही धरती से प्राकट्य हुई थी। मंदिर में पुरानी मूर्ति पर विक्रम संवत 1119 अंकित है।

अखंड ज्योत

मंदिर महंत महाबलवीर गिरि के शिष्य खेत गिरि बताते हैं कि मंडोर साम्राज्य के प्रतिहार शासक सुर सिंह के पाटवी पुत्र वंश के शासक राणा उगम सिंह इंदा ने विक्रम संवत 1306 में कंटालिया गांव वर्तमान में कुई इंदा गांव बसाया था। तब मां चामुंडा का छोटा सा मंदिर एक कैर के पेड़ के नीचे सिर्फ मूर्ति के रूप में मौजूद था । तब छोटा मंदिर निर्माण कर अखंड ज्योत शुरू की गई थी । ढाई असवार गांव यानी बालेसर सत्ता , बालेसर दुर्गावता एवं कुई इंदा गांव के लोगों की भी मंदिर की दिव्यज्योत के प्रति गहरी आस्था है।

बाड़ी का थान नाम से प्रसिद्ध है मंदिर

मंदिर के जानकार बताते हैं कि चामुंडा माता मंदिर के पुजारी सिंध प्रांत से आए महंत मेघगिरि के उत्तराधिकारी महंत भवानी गिरि ने विक्रम संवत 1700 में चामुंडा माता मंदिर की मूर्ति के चारों तरफ एक रात में भव्य मठ बनाया था। उसी दौरान ज्वार( गेहूं ) का बीज बोकर छोटी सी हरी भरी एक बाड़ी की स्थापना की थी । जिनमें चैत्रीय एवं आसोज नवरात्रा को बाड़ी को सींचा जाता है । तब से यह मंदिर बाड़ी के थान के नाम से भी विख्यात हो गया है।