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मंदिरों में छाने लगी फाल्गुनी छठा, मंडोर में शुरू हुई फाग गायन की परम्परा

होलाष्टक 22 से, निवृत्ति 28 को होगीहोरियों का होगा गायन

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मंदिरों में छाने लगी फाल्गुनी छठा, मंडोर में शुरू हुई फाग गायन की परम्परा

मंदिरों में छाने लगी फाल्गुनी छठा, मंडोर में शुरू हुई फाग गायन की परम्परा

जोधपुर. रंग व रास का महीना फाल्गुन रविवार को शुरू होकर 28 मार्च होलिका दहन के बाद पूर्ण होगा। फाल्गुन शुरू होने पर सूर्यनगरी के प्रमुख कृष्ण मंदिरों में ठाकुरजी को अबीर गुलाल अर्पित करने सहित ठाकुरजी के नियमित भोग के साथ संध्या आरती में भी आंशिक बदलाव किया जाएगा। पं. ओमदत्त शंकर ने बताया कि तारा होने के बावजूद कई जगहों पर १५ मार्च को अबूझ सावे के रूप में मान्य फूलेरा दूज को वैवाहिक आयोजन किए जाएंगे। होलाष्टक २२ मार्च को आरंभ हो जाएंगे। होलाष्टक के दौरान मांगलिक एवं महत्वपूर्ण शुभ कार्य टालने का विधान है। होलाष्टक की निवृत्ति २८ मार्च को होलिका दहन के साथ होगी।

मंडोर में शुरू हुई फाग गायन की परम्परा
मन्डोर क्षेत्र में फाल्गुन मास शुरू होने के उपलक्ष्य में क्षेत्र के गेरियो की ओर से ढोल व चंग की थाप के साथ होली के गीतों के गायन की परंपरा का निर्वहन किया गया। क्षेत्र के लक्ष्मणसिंह सोलंकी ने बताया कि शनिवार को क्षेत्रवासियों ने डांडा रोपने की परंपरा का निर्वहन किया। मन्डोर आर्य समाज के पास होली चौक में मन्डोर के गेरियों ने पुरातनकाल से चली आ रही परम्परानुसार डांडा रोपने की परम्परा निभाई। होलिका दहन तक रोपा गया डांडा उसी स्थान पर रहेगा।

होरियों का होगा गायन
शनिवार शाम को चौहाबो स्थित बड़ा गणेश जी मंदिर में आरती के बाद पार्क में क्षेत्रवासियों की ओर से होली का डांडा रोपा गया। मंदिर समिति के राजेश रूप राय व कुणाल शर्मा ने बताया कि प्रतिदिन शाम को होली तक पारम्परिक होरियों का गायन किया जाएगा।