19 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

MILLET–दुनिया मना रही मिलेट ईयर, वहीं हमारे यहां शोध-अनुसंधान ठप

जोधपुर में देश का एकमात्र अखिल भारतीय समन्वित बाजरा अनुसंधान परियोजना केन्द्र - बाड़मेर में खुलने वाले देश के पहले बाजरा अनसुंधान संस्थान की स्थापना में भी हो रही देरी- दो माह से परियोजना अधिकारी नहीं

2 min read
Google source verification

जोधपुर

image

Amit Dave

Apr 19, 2023

MILLET--दुनिया मना रही मिलेट ईयर, वहीं हमारे यहां शोध-अनुसंधान ठप

MILLET--दुनिया मना रही मिलेट ईयर, वहीं हमारे यहां शोध-अनुसंधान ठप

जोधपुर।

पूरे विश्व में जहां इस वर्ष को अन्तरराष्ट्रीय मिलेट ईयर के रूप में मनाया जा रहा है। वहीं, जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय िस्थत देश के एकमात्र अखिल भारतीय समन्वित बाजरा अनुसंधान परियोजना केन्द्र पर मोटे अनाजों में प्रमुख बाजरा से संबंधित शोध-अनुसंधान कार्य ठप पड़े है। साथ ही, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत बाड़मेर के गुडामालानी में खुलने वाले देश के पहले बाजरा अनुसंधान केंद्र के स्थापित होने में भी देरी हो रही है। इसका कारण पिछले 2 महीने से केन्द्र की परियोजना समन्वयक पद पर कार्यरत डॉ सी तारा सत्यवती का चयन निदेशक भारतीय कदन्त (मिलेट्स) अनुसंधान संस्थान हैदराबाद हो जाने के बाद यह पद खाली पड़ा है तथा इसकी जिम्मेदारी अभी तक किसी को भी नहीं दी गई है।

उल्लेखनीय है कि भारत मोटे अनाजों के अग्रणी उत्पादक देशों में शामिल है। पूरे देश में बाजरे का करीब 70-90 लाख हैक्टेयर क्षेत्र है, इसमें आधे से ज्यादा उत्पादन राजस्थान में होता है।

----

देश में बोए जाने वाला बाजरा का परीक्षण जोधपुर से

जोधपुर िस्थत केन्द्र से प्रदेश सहित पूरे देश में बोए जाने वाले बाजरा का परीक्षण होता है। केन्द्र पर पूरे देश में सरकारी व निजी कंपनियों को बाजरा की किस्मों को विकसित करने से पहले यहां परीक्षण करवाना होता है। परीक्षण में खरा उतरने पर ही किस्म को देश के किसानों को बोने के लिए उपलब्ध कराया जाता है। केन्द्र की परियोजना समन्वयक के अभाव में यह कार्य प्रभावित हो रहा है।

-----

बाजारा का सर्वाधिक उत्पादन राजस्थान में

देश में बाजरा का क्षेत्रफल सर्वाधिक अर्थात करीब 45 लाख हैक्टेयर क्षेत्र राजस्थान में होने के कारण जोधपुर (राजस्थान) में वर्ष 1995-96 में यह परियोजना केन्द्र स्थापित किया गया। यह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से वित्तपोषित केन्द्र है।

--------

यह कार्य भी हो रहे प्रभावित

- सभी नियमित व सहायक सरकारी व निजी केंद्रों पर अनुसंधान संबंधित कार्यों में बाधा।

- वार्षिक सामूहिक बैठक, जिसमें सभी सरकारी व निजी संस्थान वर्षभर में होने वाले वार्षिक कार्यों का ब्यौरा प्रस्तुत करते हैं तथा आने वाले वर्ष की वार्षिक अनुसंधान गतिविधियों का निर्धारण करते हैं, जो मुख्य रूप से बाधित हो रहा है।

- परियोजना समन्वयक नहीं होने से कृषि विश्वविद्यालयों, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से विभिन्न संस्थानों के साथ वित्तीय एवं अन्य अनुसंधान संबंधित कार्य बाधित हो रहे हैं।

--------

केन्द्र के परियोजना समन्वयक पद के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को अवगत कराया है। उम्मीद है जल्द ही यह पद भरा जाएगा

प्रदीप पगारिया, डिप्टी रजिस्ट्रार

कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर


बड़ी खबरें

View All

जोधपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग