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रामदेवरा में मेला नहीं फिर भी जोधपुर में बढऩे लगे बाबा के जातरू

रूणीचा में बाबा रामदेव के समाधि स्थल पर शीश नवाने जातरुओं के पहुंचने की संख्या में बढ़ोतरी

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रामदेवरा में मेला नहीं फिर भी जोधपुर में बढऩे लगे बाबा के जातरू

रामदेवरा में मेला नहीं फिर भी जोधपुर में बढऩे लगे बाबा के जातरू

NAND KISHORE SARASWAT

जोधपुर. जैसलमेर जिले के रामदेवरा में भाद्रपद मास की द्वितीया तिथि 8 सितम्बर को मनाए जाने वाले लोकदेवता बाबा रामदेव के अवतरण दिवस से पहले ही शीश नवाने के लिए पैदल जातरुओं के जोधपुर पहुंचने की संख्या में लगातार बढ़ोतरी होती जा रही है। कोविडकाल से पहले बाबा के जातरू श्रावणी पूर्णिमा रक्षा बंधन से ही जोधपुर में दस्तक देते रहे लेकिन इस बार अवतरण तिथि के एक माह पूर्व ही बड़ी संख्या में आना शुरू हो चुके है। रामदेवरा दर्शनार्थ आने वाले जातरू समय से पूर्व पहुंचने का एक प्रमुख कारण कोरोना की तीसरी लहर की आशंका भी मानी जा रही है। अधिकांश जातरू पैदल, दुपहिया वाहनों, जुगाड़, बसों, जीपों, लोडिंग टैक्सियों, टैम्पों के माध्यम से रामदेवरा पहुंच रहे है। खास तौर से जुगाड़ों व दुपहिया वाहनों पर निर्धारित संख्या से अधिक जातरू नजर आ रहे है। पैदल जातरुओं के लिए अभी तक रेडियम पट्टियों का वितरण नहीं होने से रात्रि के समय सड़क पर दुर्घटनाएं हो सकती है। पत्थरों की खानों में जहां पानी का भराव है वहां स्नान आदि से रोकने के लिए कोई इंतजाम अभी तक प्रशासन की ओर से नहीं है। चिकित्सा व कोविड जांच के लिए भी कोई पहल नहीं की गई है। जोधपुर से रामदेवरा की ओर जाने वाले प्रमुख मार्ग पर जगह जगह बारिश के बाद जमा मिट्टी पत्थर व कंकर और जर्जर हो चुकी सड़कें भी पैदल जातरुओं के लिए परेशानी बन सकती है। पैदल पथ अभी तक अधूरा रामदेवरा पैदल मार्ग आज भी आधा अधूरा है। सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए करीब 12 साल पूर्व तत्कालीन राज्य सरकार ने जोधपुर से देचू तक 96 किमी पैदल पथ बनाने की घोषणा की थी। घोषणा के तहत जोधपुर से देचू तक मुख्य सड़क से सटकर 4 मीटर चौड़ा पैदल पथ बनना था। लेकिन पैदल पथ आज भी आधा अधूरा पड़ा है। कई जगहों पर अतिक्रमण तो कई जगह मिट्टी तक गायब कर दी गई है।