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इस बार रूठे इंद्रदेव के कारण शीतकालीन प्रवासी परिंदों की बढ़ेगी मुश्किलें

मारवाड़ के अधिकांश प्रमुख तालाब सूखे, खींचन में प्रवासी पक्षी कुरजां के लिए पाइप लाइन से प्यास बुझाने की तैयारी

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इस बार रूठे इंद्रदेव के कारण शीतकालीन प्रवासी परिंदों की बढ़ेगी मुश्किलें

इस बार रूठे इंद्रदेव के कारण शीतकालीन प्रवासी परिंदों की बढ़ेगी मुश्किलें

NAND KISHORE SARASWAT

जोधपुर. इस बार मारवाड़ से रूठे इंद्रदेव के कारण हर साल शीतकालीन प्रवास पर आने वाले मेहमान परिंदों की भी मुश्किलें बढऩे की संभावना प्रबल हो गई है। खास तौर से 30 हजार से अधिक की तादाद में जोधपुर जिले के खींचन में शीतकाल प्रवास पर आने वाले पक्षी कुरजां के लिए जल संकट की समस्या गंभीर है। मारवाड़ के प्रमुख जलाशय सूखने से पक्षी वैज्ञानिक और पक्षी प्रेमियों की चिंता बढ़ गई है। घट सकता है प्रवास जोधपुर के आसपास के जल बिंदुओं में बरसात न होने की स्थिति में प्रवासी पक्षियों को इस बार बेहद निराश होना होगा ।जोधपुर जिले के ओळवी,रामासनी, बड़ली ,गुढ़ा ,जाजीवाल आदि सभी तालाबों में लगभग सूखे की स्थिति रहेगी और ऐसे में सितम्बर से शुरू होने वाला पक्षी प्रवास भी उतना नही रहेगा जितना हर साल रहता है। पाली जिले के सरदार समंद तालाब में पानी की आवक कम हुई है। पक्षी व्यवहार विशेषज्ञ शरद पुरोहित के अनुसार अक्सर भरतपुर में जब भारी बरसात होती हैं तब काफी पक्षी मारवाड़ के जल बिंदुओं की ओर रुख करते हैं । इस बार यह प्रवास रास्ते से लौट सकता हैं क्योंकि जवाई से आगे मारवाड़ में बरसात न्यून से भी कम रही हैं।

इसी माह होती है कुरजां की दस्तक

साइबेरियन क्रेन कुरजां ने कजाकिस्तान व मंगोलिया से भारत के सफर पर आने के लिए उड़ान भर ली है और हमेशा की तरह कुरजां का पहला दल 28 से 31 अगस्त तक खीचन तक पहुंचने की संभावना है। लेकिन प्रमुख जलाशयों के सूखने से कुरजां सहित विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों के लिए प्यास बुझाना इस बार सबसे बड़ी चुनौती होगी । पक्षी प्रेमी सेवाराम माली ने बताया कि खींचन के सभी प्रमुख तालाबों में पानी नहीं होने से हजारों कुरजां का जीवन बचाना मुश्किल हो जाएगा । उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए जिम्मेदारों से कुरजां के प्रवास से पहले तालाबों में नहरी पानी डलवाने की मांग की है जिस पर उपखण्ड अधिकारी डॉ . अर्चना व्यास ने खीचन में कुरजां के पड़ाव स्थलों का जायजा लेकर उच्च न्यायालय के निर्देशों की पालना में जलदाय विभाग के अधिकारियों को तालाब में पानी भरने के निर्देश दिए ।

जवाई बांध का तल भी आने लगा नजर

मारवाड़ का प्रमुख पेयजल स्रोत जवाई बांध का तल भी इन दिनों नजर आने लगा है। इससे मानवीय जीवन के साथ मवेशी, प्रवासी पक्षी, मगरमच्छ सहित जलीय जीवों पर संकट के बादल मंडराने लगे है।

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