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GI TAG–उत्पादन-गुणवत्ता में अव्वल, अब मिर्च-मैथी को जीआई टैग का इंतजार

उत्पादन- गुणवत्ता में अव्वल, लेकिन आधिकारिक मोहर नही लगी- सोजत की मेहंदी, बीकानेर के भुजिया सहित प्रदेश की 12 वस्तुओं को जीआई टैग

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जोधपुर

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Amit Dave

Jun 24, 2023

GI TAG--उत्पादन-गुणवत्ता में अव्वल, अब मिर्च-मैथी को जीआई टैग का इंतजार

GI TAG--उत्पादन-गुणवत्ता में अव्वल, अब मिर्च-मैथी को जीआई टैग का इंतजार

जोधपुर।
प्रदेश में अनेक फसलों को अधिकृत भौगोलिक पहचान (जीआई) मिलने के बावजूद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्र के उत्पाद के रूप में पहचान बना चुकी मिर्च को अभी तक भौगोलिक पहचान (जीआई) नही मिली है। यही स्थिति नागौर की कसूरी मेथी की है। देश में सबसे ज्यादा मेथी की पैदावार राजस्थान में होती है। इसके बावजूद मिर्च की तरह मेथी को भी भौगोलिक पहचान (जीआई) नही मिली है। अगर इन फसलों को भौगोलिक पहचान (जीआई) मिलती है तो इन फसलों के विपणन में फायदा होगा व किसानो को इन फसलों का सही मूल्य दिलाने में भी मदद मिलेगी।
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मेथी
देश मे मेथी उत्पादन की दृष्टी से राजस्थान का प्रथम स्थान है। यहां की मेथी विश्व स्तर पर अपनी पहचान कायम कर चुकी है। निर्यात में भी मेथी की भरपूर मांग रहती है ।

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मिर्च

मारवाड़ मथानिया की मिर्च विश्व स्तर पर पहचान बना चुकी है। अपने स्वाद व गुणवत्ता की वजह से मारवाड़ में पैदा होने वाली मिर्ची की खास मांग रहती है।
जोधपुर जिले में मथानिया वैरायटी की मिर्च जिले के पीपाड़, सोयला, मंडोर क्षेत्र में पैदा होती है।

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फसल -बुवाई- पैदावार

मेथी- 46401 हेक्टेयर- 66924.70 मीट्रिक टन
मिर्च-- 1000 हेक्टेयर-10000 मीट्रिक टन

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प्रदेश के इन उत्पादों पर लग चुकी मोहर

बगरू हैंड ब्लॉक प्रिंट, ब्लू पॉटरी जयपुर, ब्लू पॉटरी जयपुर (रेनवाल), कठपुतली, कठपुतली (लोगो), कोटा डोरिया, कोटा डोरिया (लोगो), मॉलेला क्ले वर्क, सांगानेरी हैंड ब्लॉक प्रिंटिंग, थेवा आर्ट वर्क, मॉलेला क्ले वर्क (लोगो), फुलकारी, पोकरण पॉटरी, बीकानेरी भुजिया, मकराना मार्बल व सोजत मेहंदी।
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क्या है जीआई टैग
किसी वस्तु या उत्पाद की किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में हुई उत्पत्ति तथा उससे जुड़े गुणों को सूचित करने के लिए जीआई टैग दिया जाता है। यह उसी उत्पाद को दिया जाता है, जो विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में 10 वर्ष या इससे ज्यादा समय से निर्मित या उत्पादित किया जा रहा हो। जीआई टैग मिलने के बाद कोई भी अन्य निर्माता समान उत्पादों को बाजार में लाने के लिए नाम का दुरुपयोग नहीं कर सकता है। भारत में यह 15 सितंबर 2003 से लागू है।

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मारवाड़ के नागौर की मेथी और मथानिया की मिर्च प्रसिद्ध है। इनको विशिष्ट पहचान मिलनी चाहिए इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।

डॉ एम एल मेहरिया,वरिष्ठ वैज्ञानिक

कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर
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मारवाड़ में नागौर की कसूरी मेथी और मथानियाको भौगोलिक पहचान (जीआई) मिलता है, तो निश्चित ही इन फसलों के विस्तार करने, उत्पाद को वैश्विक स्तर पर विपणन करने में मदद मिलेगी।

भारतीय किसान संघ भी इन फसलों को जीआई टैग दिलवाने हेतु प्रयास करेगा।
तुलछाराम सिंवर, प्रदेश मंत्री
भारतीय किसान संघ