
चौपासनी फिल्टर हाउस के पीछे नगर निगम की ओर से प्रगतिरत 'जलरोधी सड़क' (वाटर बाउंड मेकेडम रोड)
नंदकिशोर सारस्वत
जोधपुर. नगर निगम ने जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिशाषी अभियंता को विभाग की ओर से जलापूर्ति करने वाली पानी की पाइप लाइनों के लिए प्रयुक्त जमीन के बदले नोटिस जारी कर 9.22 करोड़ जमा कराने को कहा है। निगम की ओर से चौपासनी फिल्टर हाउस के पीछे ग्राम सुथला व गेंवा के खसरा संख्या 27 व 885 में प्रयुक्त जमीन के बदले पीएचइडी को करोड़ों की राशि जमा कराने के लिए बार बार रिमाइंडर पत्र भी भेजे जा रहे है। जबकि पीएचइडी विभाग के अधिकारियों का कहना है की चौपासनी फिल्टर हाउस वर्ष 1936 में स्टेट समय में निर्मित 84 साल पुराना परिसर है। जबकि राजस्व विभाग में जमीन वनविभाग के नाम दर्ज है।
क्या है मामला
चौपासनी फिल्टर हाउस के पीछे नगर निगम की ओर से प्रगतिरत 'जलरोधी सड़क' (वाटर बाउंड मेकेडम रोड) के पास करीब 5 हजार 371 वर्गमीटर क्षेत्र में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की ओर से जलापूर्ति करने वाली पानी की पाइप लाइनें बिछी है। नगर निगम आयुक्त जोधपुर ने अधीक्षण अभियंता को 11 जून 2020 को पत्रांक संख्या 796-80 के माध्यम से कहा की चौपासनी फिल्टर हाउस के पीछे ग्राम सुथला व गेंवा के खसरा संख्या 27 व 885 में डब्ल्यूबीएम सडक का कार्य प्रगतिरत है एवं वर्तमान में पीएचइडी विभाग की पाइप लाईने भी इसी क्षेत्र से गुजर रही है । आयुक्त ने पाइप लाईनों के अधीन जोधपुर नगर निगम की 5371 वर्ग मीटर जमीन की बाजार दर के अनुसार 9.22 करोड़ रुपए नगर निगम के खाते में जमा कराने को कहा है अन्यथा तद्नुसार आवश्यक कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
निगम अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा पक्ष
चौपासनी फिल्टर हाउस जोधपुर शहर में स्टेट समय का फिल्टर हाउस है और विभाग की ओर से महत्वपूर्ण पाइप लाईनों के लिए लम्बे समय से खसरा संख्या 27 व 885 की भूमि का उपयोग किया जा रहा है । मैने साइट का अवलोकन किया है। रही बात निगम को जमीन हर्जाने की तो आगामी एक दो दिन में निगम अधिकारियों से पूरे मामले में बातचीत कर विभाग का पक्ष रखा जाएगा।
नक्षत्रसिंह चारण, अधीक्षण अभियंता, शहर पीएचइडी जोधपुर
जमीन का असली मालिक वनविभाग मौन ?
वर्ष 1936 में निर्मित चौपासनी फिल्टर हाउस परिसर में बने चार फिल्टर प्लांट , तीन बड़े पम्प हाउस , कार्यालय तथा 20 से भी अधिक आवासीय भवन की समस्त भूमि राजस्व रिकार्ड में आज भी वन विभाग के नाम दर्ज है । राजस्थान राजपत्र 1950 के अलावा विभाग के सेवानिृवत्त अधीक्षण अभियंता महेशचन्द्र शर्मा की उम्मेद सागर बांध पर तैयार की गई रिपोर्ट में भी फिल्टर हाउस की तमाम जमीन को वनविभाग के नाम दर्ज होना बताया गया है।
Published on:
09 Oct 2020 10:42 pm
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