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मारवाड़ में स्वर्ण को तोले के रूप में खरीदने व बेचने की परम्परा

  मारवाड़ी एक तोला स्वर्ण का वजन 11.664 ग्राम, धनतेरस पर स्वर्ण और जोधपुरी चांदी के सिक्के खरीदने की परम्परा

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मारवाड़ में स्वर्ण को तोले के रूप में खरीदने व बेचने की परम्परा

मारवाड़ में स्वर्ण को तोले के रूप में खरीदने व बेचने की परम्परा

NAND KISHORE SARASWAT

जोधपुर. मारवाड़ की राजधानी रहे प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े शहर जोधपुर में प्रत्येक पर्व त्योहार के दौरान शहरवासियों का स्वर्ण के प्रति मोह आज भी बरकरार है। मारवाड़वासियों का स्वर्ण के प्रति मोह मृग मरीचिका नहीं बल्कि यर्थात हैं। मारवाड़ की राजधानी रहे प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े शहर जोधपुर में आयोजित सांस्कृतिक पर्व-त्योहार, विवाह समारोह व सामाजिक आयोजनों के दौरान शहरवासियों का स्वर्ण के प्रति मोह स्पष्ट नजर भी आता हैं। जोधपुरी 'कळदार सिक्के का वजन 11.664 ग्राम व धातु की शुद्धता होने के कारण सदियों से पसंद बना हुआ है। कळदार सिक्के पूर्ण रूप से तात्कालिक धातु कीमत के होने के कारण सिक्के के वजन के बराबर उसका मूल्य पुन: मिलने की वजह से मांग बनी रही है।

पिछले साल से दुगने सिक्के

जोधपुर सर्राफा एसोसिएशन की ओर से तैयार किए जाने वाले 99 प्रतिशत शुद्ध दस ग्राम के सिक्को का मूल्य 700 रुपए है। एसोसिएशन की ओर से 5, 10,20, 50 व 100 ग्राम तक के कुल 500 किलो के सिक्के तैयार करवाए गए है जो पिछली साल की तुलना में दुगने है। जोधपुर सर्राफा एसोसिएशन के पूर्व सचिव सुरेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि कोरोना का प्रकोप कमजोर होने के बाद इस बार पिछले साल की तुलना में सिक्कों की अच्छी बिक्री की संभावना है।

तोले का प्रचलन

पूरे भारत में संभवत समूचे मारवाड़ में ही स्वर्ण को तोले के रूप में खरीदा व बेचा जाता हैं। मारवाड़ में एक तोला सोने का वजन 11.664 ग्राम का होता है जबकि दूसरे जगहों पर 10 ग्राम स्वर्ण को एक तोला मानकर खरीदा व बेचा जाता हैं।

सोने के भाव रखते है पता

मारवाड़ के श्रमिक-मध्यम वर्ग से लेकर धनाढ्य वर्ग तक भले ही दिनचर्या में प्रयुक्त वस्तुओं के भाव के बारे में जानकारी न रखते हो लेकिन सोने के भाव में उतार चढ़ाव का जरूर ध्यान रखते है।

खेजड़ली मेले व गवर पूजन में भी झलकता है वैभव

जोधपुर में प्रतिवर्ष वैशाख कृष्ण तृतीया को धींगा गवर मेले के दौरान मां पार्वती प्रतीक गवर पूजन महोत्सव के दौरान जोधपुर जगह-जगह विराजित करीब गवर प्रतिमाओं पर एक क्विंटल से अधिक स्वर्ण आभूषणों का शृंगार किया जाता हैं। इस आयोजन में आधी रात के बाद शहर की महिलाएं गवर के दर्शनार्थ पहुंचती हैं। भीतरी शहर के अकेले सुनारों की घाटी क्षेत्र में विराजित गवर प्रतिमा को रामनवमी, पायल, कंगन, झूमर, हाथ फूल, नेकलेस, बजरकंठी, कंसेरा, बाजुबंद सहित करीब 11 किलो आभूषणों से शृंगार किया जाता हैं। यह आयोजन न केवल मारवाड़ की संस्कृति और वैभव का प्रतीक माना जाता है बल्कि इससे सुरक्षा प्रणाली की परख भी होती हैं। इसके अलावा भाद्रपद माह की दशमी को जोधपुर जिले के खेजड़ली में आयोजित मेले में भी सभी महिलाएं भारी भरकम स्वर्ण के आभूषण पहन कर पहुंचती है।