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जोधपुर के इस गौशाला की गाएं खा रही हैं 1 करोड़ का चारा, लेकिन मंडरा रहे इस खतरे ने बढ़ाई चिंता

सुविधाएं बढ़ाने पर 50 लाख से अधिक खर्च, हर माह हर गायों को खिलाया जाता है एक करोड़ का चारा  

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 If the livestock gets cattle, the contractor will have to pay two thousand rupees fine

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अविनाश केवलिया/जोधपुर. हर साल बारिश में नान्दड़ी गोशाला विवादों में रहती है। दो साल पहले 100 से अधिक गायों की मौत से यहां की व्यवस्थाएं आरोपों में घिरी। पिछले साल भी बारिश के दिनों में कई गोवंश की मौतें हुई। इस बार मानसून सक्रिय होने से पहले लाखों रुपए खर्च कर व्यवस्थाएं बेहतर करने के दावे किए जा रहे हैं। ड्रेनेज सिस्टम, टिन शेड जैसे कार्यों के साथ चारा खर्च भी बढ़ा दिया। लेकिन अब बीमारी और पॉलीथिन के कारण गोवंश संकट में है।

गोशाला में वर्तमान में करीब 5 हजार गायें हैं। दो साल पहले हालात बिगडऩे के बाद से 6 नए बाड़े बनाए गए। अब यहां गायों के लिए 8 बड़े और बीमार गायों के लिए छोटे बाड़े हैं। बारिश से गायों को बचाने के लिए पर्याप्त टिन शेड और ड्रेनेज सिस्टम के दावे किए जा रहे हैं। फिर भी गोवंश की मौत नहीं रुक रही। प्रतिदिन औसतन दो-तीन गायें दम तोड़ती हैं। इसका प्रमुख कारण गायों के पेट से निकलने वाली पॉलीथिन है। गोशाला प्रबंधन और पशु चिकित्सकों के अनुसार प्रतिदिन दो से तीन गायों के पेट से कई किलो पॉलीथिन निकाला जाता है।

बारिश में ऐसे हालात


- 2016 में एक सप्ताह में 100 गायों की मौत के बाद गोशाला चर्चा में आई।

- 2017 में तीन दिन में 20 से अधिक गायों की मौत पर भी हुआ विवाद।

दुधारु गाय छुड़ाने आते हैं, बीमार को नहीं

नगर निगम जिस गोवंश को लाता है उनमें कई बीमार और विकलांग होते हैं। इन्हें छुड़ाने कोई नहीं आता। दुधारू गायों को छुड़ाने के लिए कई लोग पहुंच जाते हैं। एक गोवंश छोडऩे के लिए 5 हजार का जुर्माना वसूला जाता है। एक माह में करीब ढाई लाख का राजस्व इसीसे मिलता है।

एक करोड़ का चारा खर्च

संभाग के सबसे बड़े पशुबंदी गृह नान्दड़ी की यह गोशाला का वार्षिक खर्च करीब 14-15 करोड़ है। प्रतिमाह एक करोड़ रुपए चारे-पानी पर खर्च होता है। दो साल में गायों की मौत के बाद यह खर्च और चारा डालने की व्यवस्था में बदलाव किया गया है।

इनका कहना...

नगर निगम की ओर से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए बेहतर व्यवस्था देने की कोशिश करते हैं। इस बार स्थिति अलग है। गायों के पेट से निकलने वाला पॉलीथन और बीमारी गोवंश के लिए सबसे बड़ा संकट है। बीमार गोवंश का हरसंभव उपचार किया जाता है।

- विरेन्द्र कुमार पुरोहित, प्रभारी नान्दड़ी गोशाला जोधपुर