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AIIMS: घोटाले के लिए डॉक्टराें की फर्जी पर्चियों का इस्तेमाल

AIIMS Jodhpur

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AIIMS: घोटाले के लिए डॉक्टराें की फर्जी पर्चियों का इस्तेमाल

AIIMS: घोटाले के लिए डॉक्टराें की फर्जी पर्चियों का इस्तेमाल


- आरजीएचएस में दवाइयों की गबन का मामला

जोधपुर. आरजीएचएस कार्ड से करोड़ों की दवाइयों के घोटाले के मामले में आए दिन नई जानकारी सामने आ रही है। आरोपी पुलिस को भी गुमराह कर रहा है। मामले में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) का नाम आने के बाद एम्स ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस मामले में जाली प्रिस्क्रिप्शंस (परामर्श पर्ची), फर्जी हस्ताक्षरों और नकली मुहरों का प्रयोग किया गया है। डॉक्टरों की फर्जी पर्चियाें से दवाइयां उठा ली गई है और नाम डाॅक्टरों पर आ रहा है। इस मामले में एम्स के बाहरी लोगों का भी हाथ होने का अंदेशा है जो निहित स्वार्थ के लिए सरकारी अस्पताल को बदनाम कर रहे हैं।

एम्स प्रशासन का कहना है कि अब तक राज्य सरकार और पुलिस की ओर से भी जो भी जानकारी मांगी गई है वह उपलब्ध करवाई गई है। अब तक की जानकारी में बाहरी लोगों का ही हाथ होने का अंदेशा है। एम्स प्रदेश के लोगों को स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करने और इसमें उच्च स्तरीय नैतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि आरजीएचएस के संयुक्त परियोजना निदेशक अभिषेक सिंह किलक ने गत 26 सितम्बर को बासनी थाने में आरजीएचएस कार्ड से करोड़ों की दवाइयों के घोटाले का मामला दर्ज कराया था। 27 सितम्बर को झंवर मेडिकल एजेंसीज के मालिक जुगल झंवर को गिरफ्तार किया गया था। जबकि मध्यस्थ मसूरिया निवासी उमेश परिहार भूमिगत है। 11 दिन रिमाण्ड के बाद जुगल को नौ अक्टूबर को न्यायिक अभिरक्षा में भिजवाया गया था। चिकित्सकों की भूमिका की जांच की जा रही है।

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मामले में जाली परामर्श पर्ची, फर्जी हस्ताक्षरों और नकली मुहरों का प्रयोग किया गया है। एम्स का मामले से कोई लेना-देना नहीं है।

डॉ जीवन विश्नोई, पीआरओ, एम्स जोधपुर