
impact of doctors strike in Jodhpur
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज में चल रही रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के कारण मथुरादास माथुर, महात्मा गांधी और उम्मेद अस्पताल में व्यवस्थाएं हांफने लगी है। वहीं 18 दिसंबर से शुरू हुई हड़ताल के दौरान रविवार शाम तक 104 मरीजों की मौत हो गई। हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि कोई भी मौत इलाज के अभाव में नहीं हुई है, उसके बावजूद रेजीडेंट चिकित्सकों की हड़ताल से कहीं न कहीं शहर के बड़े अस्पतालों में चिकित्सकीय व्यवस्था कमजोर हुईं है। अस्पताल में भर्ती मरीजों की जान भी सांसत में आ चुकी है। पूर्ण रूप से पूरी जिम्मेदारी सीनियर्स डॉक्टर के भरोसे है।
वहीं रविवार के आंकड़ों के मुताबिक हड़ताल के दौरान मथुरादास माथुर अस्पताल में 9 और महात्मा गांधी अस्पताल में 2 मरीजों की मौत हो गई। उधर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टर्स न होने से ज्यादातर मरीज शहर के निजी अस्पताल और मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल में इलाज के लिए आ रहे हैं। आपात स्थिति वाले कई गंभीर रोगी तो निजी अस्पतालों की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं। ऐसे में निजी अस्पतालों में सामान्य दिनों की तुलना में आउटडोर व भर्ती मरीजों की संख्या 20 से 30 फीसदी तक बढ़ी है।
सेवारत चिकित्सक व रेजीडेंट डॉक्टर अभी तक भूमिगत
सेवारत चिकित्सक व रेजीडेंट डॉक्टर नेता हड़ताल के कारण भूमिगत हैं। बताया जा रहा है कि सभी डॉक्टरों की मांग है कि इस मामले में राज्य सरकार स्वयं हस्तक्षेप करे। ऐसे में राज्य सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही है। जानकार बता रहे हैं कि ऐसे में डॉक्टर्स भी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
अस्पतालों के हाल
मथुरादास माथुर अस्पताल
आउटडोर - 747
भर्ती मरीज-79
प्रसव-19
सिजेरियन प्रसव-6
मेजर ऑपरेशन-0
माइनर-0
मौत-9
(एमडीएम अस्पताल की यह रिपोर्ट शनिवार 3 से रविवार दोपहर 3 बजे तक की है। )
महात्मा गांधी अस्पताल
आउटडोर- 147
इमरजेंसी ओपीडी-280
भर्ती मरीज-9
मेजर ऑपरेशन-2
माइनर ऑपरेशन-12
मौत-2
(यहां रिपोर्ट रविवार सुबह से शाम की है। )
उम्मेद अस्पताल
आउटडोर- 337
भर्ती मरीज-78
मेजर ऑपरेशन-0
माइनर ऑपरेशन-2
सामान्य व सिजेरियन प्रसव-11
मौत- 0
(यह रिपोर्ट रविवार सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक की है।)
Published on:
25 Dec 2017 10:42 am
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