
rajasthan high court
जोधपुर . बहुचर्चित एएनएम भंवरीदेवी के अपहरण व हत्या के मामले में मंगलवार को अभियोजन की गवाह रेलवे पुलिस की सब इंस्पेक्टर संतोषकुमारी वैष्णव के बयान दर्ज किए गए। अनुसूचित जाति-जनजाति के विशिष्ट न्यायालय के पीठासीन अधिकारी मधुसूदन शर्मा के समक्ष सीबीआई के विशिष्ट अधिवक्ता मुम्बई के एेजाज खान ने मामले में गवाह रेलवे पुलिस की सब इंस्पेक्टर के चार पन्नों के बयान दर्ज करवाए।
आपत्ति के तहत बयान दर्ज
बचाव पक्ष की ओर से की गई आपत्ति के अधीन बयान दर्ज किए गए। इस गवाह ने मामले की एक आरोपी इंद्रा विश्नोई से पुलिस अभिरक्षा में की गई पूछताछ के सम्बन्ध में महत्वपूर्ण गवाही दी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता संजय विश्नोई और राजेंद्र चौधरी ने न्यायालय में इस बिंदु पर एेतराज जताया कि पुलिस अभिरक्षा में अभियुक्त के कहे कथन या स्वीकारोक्ति ग्राह्य नही होती है। कोर्ट ने बचाव पक्ष की इस आपत्ति को फैसले के समय तय करने के आदेश के साथ आपत्ति के अधीन गवाही की अनुमति दी। सुनवाई के दौरान पुलिस ने कड़ी सुरक्षा के साथ इस मामले के आरोपी इंद्रा, सोहनलाल, बलदेव, शहाबुद्दीन, परसराम, बिशनाराम, अशोक, दिनेश, कैलाश, ओमप्रकाश, पुखराज, रेशमाराम ,सहीराम, उमेशाराम और भंवरी के पति अमरचंद नट को दोपहर ढाई बजे कोर्ट में पेश किया। नियमित सुनवाई के तहत बुधवार को इस मामले में सीबीआई के इंस्पेक्टर आरके सिंह के बयान होंगे।
गुरुवार को हो सकती है डीएनए एक्सपर्ट की गवाही
इस हाई प्रोफाइल अपहरण व हत्या के मामले में गवाही देने के लिए अमरीका की फैडरल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (एफबीआई) की डीएनए एक्सपर्ट अंबर बी कार को गुरुवार को अदालत में बयान देने के लिए सूचना भेजी जा चुकी है। इस विदेशी गवाह की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही के लिए अभियोजन ने कोर्ट में मंगलवार को फिर दरख्वास्त लगा दी है। सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि अमरीकी दूतावास को इस सम्बन्ध में सूचना दी गई है। सात साल पुराने भंवरीदेवी हत्याकांड की जांच कर चुकी सीबीआई ने दावा किया था कि राजीव गांधी लिफ्ट नहर से बरामद जली हड्डियां भंवरीदेवी की ही थी, लेकिन एसएफएल इनसे डीएनए निकालने में नाकाम रहा था। इसलिए सैम्पल अमरीका स्थित एफबीआई को भेजे गए थे। डीएनए एक्सपर्ट अम्बर बी कार को यही जानकारी कोर्ट में देनी है कि नहर में मिली हड्डियां भंवरीदेवी की थी या नहीं।
२३ वर्ष की उम्र में आठवीं पास करने पर सरपंच को मान लिया दोषी
जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता ने सिरोही के बरलूट थाना क्षेत्र स्थित गांव मण्डवारियां के सरपंच दलपतसिंह राजपुरोहित के खिलाफ जारी अग्रिम अनुसंधान पर रोक लगाते हुए तत्कालीन जांच अधिकारी व वर्तमान बाड़मेर के एएसपी रामेश्वर मेघवाल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। एएसपी रामेश्वर मेघवाल ने सरपंच को सिर्फ इस आधार पर फर्जी प्रमाण पर चुनाव लडऩे का प्रथमदृष्टया दोषी मान लिया था कि उसने 23 वर्ष की उम्र में आठवीं कक्षा उत्तीर्ण की थी।
दो बार जांच हुई
मामले के अनुसार मण्डवारिया के सरपंच दलपतसिंह राजपुरोहित के खिलाफ आठवीं कक्षा के फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर चुनाव लडऩे की शिकायत के साथ नरेंद्रसिंह देवड़ा ने एक एफआईआर दर्ज करवाई, जिसकी दो बार जांच हुई तो यह तथ्य पाया गया कि दस्तावेज में कोई कमी नहीं है, लेकिन बाद में जांच अधिकारी रामेश्वरलाल मेघवाल ने जांच रिपोर्ट में दलपतसिंह को केवल इसलिए प्रथमदृष्टया दोषी मान लिया, क्योंकि दलपत सिंह ने 23 वर्ष की उम्र में आठवीं कक्षा उत्तीर्ण की थी। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए आगामी पेशी पर वर्तमान बाड़मेर एएसपी व तत्कालीन जांच अधिकारी रामेश्वरलाल मेघवाल को आगामी पेशी पर कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया।
Published on:
24 Jan 2018 10:19 am
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