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बाल दिवस विशेष: इंटरनेट में डूबता बच्चों का बचपन

आज बचपन इंटरनेट में कहीं खो गया है। बाल दिवस पर पढ़ें विशेष रिपोर्ट

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children's day special

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केस-1

दुनियाभर में आतंक बन चुके खतरनाक ब्लू व्हेल गेम की धमक जोधपुर में भी सुनाई दी। एक किशोरी गेम का टास्क पूरा करने के लिए स्कूटी सहित कायलाना झील में उतर गई। चिकित्सकों की मदद से बमुश्किल उसकी मानसिक स्थिति सामान्य की जा सकी। इस घटना से जोधपुर ही नहीं, बल्कि प्रदेशभर में सनसनी फैल गई थी।

केस-2
शहर के एक निजी स्कूल में आठवीं कक्षा का बच्चा सोशल मीडिया पर बने ग्रुप के चंगुल में आकर इतना अवसाद में आ गया कि कई माह तक मानसिक रूप से पीडि़त रहा। वह रात को नींद में उठ-उठकर अपनी मां से पूछने लगा कि उसने आखिर ऐसा क्या किया है कि उसके साथी विद्यार्थी उसे चिढ़ा-चिढ़ाकर परेशान कर रहे हैं।

शरीर के विकास के लिए खेल जरूरी होता है, लेकिन वर्तमान पीढ़ी खेलों से ही दूर होती जा रही है। आज खेलों का स्थान स्मार्ट फोन और यू-ट्यूब व इंटरनेट पर आ रहे गेम ने ले लिया है। इंटरनेट के बढ़ते प्रभाव के कारण बचपन खो गया है। अब बच्चे पार्क में खेलने के बजाय घर में बैठकर फोन या कम्प्यूटर पर गेम खेलना ज्यादा पसंद करते हैं। यह खेल बच्चों को इस प्रकार से अपने जाल में फंसाते हैं कि बाद में आदत या लत बन जाती है। बच्चों में बढ़ती मोबाइल व कम्प्यूटर गेम्स की लत को लेकर जब बच्चों से बारे में जानना चाहा, तो उन्होंने यह बताया कि उन्हें ये खेल लुभावने और रोमांचक लगते हैं। इसमें खेलने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता है। गेम्स के कैरेकटर ज्यादा पसंद आते हैं।

स्वास्थ्य और मानसिकता पर कुप्रभाव

इंटरनेट पर उपलब्ध गेम में बच्चो को टास्क देकर लुभाया जाता है। इससे बच्चे उस खेल के प्रति आकर्षित होते हैं। धीरे-धीरे बच्चे इतने आदतन हो जाते हैं कि वे अधिकतर समय मोबाइल एवं कम्प्यूटर गेम में ही बिताने लगते हैं। बच्चों में इंटरनेट संबंधित गेम के अधिक प्रचलन से बच्चों में मानसिकता प्रभावित होती है। बच्चे उग्र और हिंसक होते जाते हंै। समाज और परिवार से दूर होते जाते हैं।

मनोचिकित्सक का कहना


बच्चे इंटरनेट सम्बन्धित गेम में समय अधिक खराब करते हैं। इससे समय की बर्बादी होती है। रात को ऐसे गेम खेलने से नींद पूरी नहीं होती है। इन गेम्स में बच्चों में एक टास्क पूरा कर दूसरा टास्क जीतने की आदत हो जाती है। रीयल वल्र्ड में जीतना मुश्किल होने पर बच्चे डिप्रेशन में चले जाते हैं। इस कारण बच्चे वर्चुअल वल्र्ड के अलावा रीयल वल्र्ड में भी उत्तेजित हो जाते हैं। ऐसे गेम बच्चों पर बहुत हानिकारक प्रभाव डालते हैं। -डॉ. जीडी कूलवाल

अध्यापकों का कहना

'बच्चों में इन हानिकारक खेलों के प्रभाव को रोकने के लिए माता-पिता, अध्यापकों और पूरे समाज को आगे आना होगा। इसके लिए स्कूलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए। साथ ही बच्चों में इसकी जागरूकता लानी चाहिए। बच्चों को इनके हानिकारक प्रभावों से अवगत करवाना चाहिए। - बाबूलाल चौधरी , प्रिंसिपल

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