
father of martyr Prabhu Singh
'मैं दुखी हूं कि मेरा जवान बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा.. लेकिन सीना गर्व से फूल गया जब ये संदेश आया कि बेटा देश के लिए शहीद हो गया। बेटे के जाने का दुख किसे नहीं होता... मैं हर छोटी-छोटी बात को याद कर फफक-फफक कर रो पड़ता हूं, लेकिन दिल में खुशी है कि बेटा मर कर भी अमर हो गया।' जम्मू-कश्मीर के माछिल सेक्टर में आतंकी हमले में जान गंवाने वाले जोधपुर के प्रभु सिंह के पिता चंद्र सिंह ये कहते-कहते अपनी शॉल में कभी मुंह छुपा लेते हैं, शायद दुनिया को आंसू ना दिखाना चाहते हों। कभी पूरे गर्व से शॉल हटा कर बात करते हैं। जवान बेटे को यूं खो देने का गम जहां उन्हें साल रहा है, वहीं इस बात के लिए उनका सीना गर्व से फूल जाता है कि वे शहीद के पिता हैं।
चंद्र कांत ने बताया कि आज उनके बेटे का जन्म दिन है। 22 नवंबर की रात सूचना मिली कि उनका बेटा नहीं रहा। एेसा लगा मानो पांव के नीचे से जमीन खिसक गई हो। पत्थर हो गए वो एकबारगी। बस दिमाग में एक ही बात कि बहू को किस मुंह से ये बात बताऊंगा। प्रभु ने चार साल पहले आर्मी जॉइन की थी। पिता खुद भी सेना में हवलदार थे। 18 साल पहले सेवानिवृत्त हुए हैं। दो साल पहले बेटे की शादी की थी। प्रभु दिवाली पर घर आया था। एक महीने की छुट्टी लेकर...10 माह की अपनी बच्ची संग खूब खेला था, लेकिन खुशी ठहरी भी तो क्षणभर के लिए। हमारे पास तो यादें हैं, लेकिन उस मासूम के पास अपने पिता की कोई याद नहीं होगी। प्रभु की मां और पत्नी इस हालत में भी नहीं कि उनसे कुछ बात की जा सके। पल भर में हमारी दुनिया ठहर सी गई।
राजनीति बंद कर आर-पार की लड़ाई हो
पिता चंद्रकांत का खून खौल उठा जब उन्हें ये पता चला कि उनके बेटे का शव क्षत-विक्षत कर दिया। उनका कहना है कि सरकार को शहीदों की शहादत पर राजनीति ना करके आर-पार की लड़ाई लडऩी चाहिए। आतंक को पनाह देने वाले बातों से नहीं समझेंगे।
Published on:
23 Nov 2016 01:25 pm
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