
hearing on pil by dr gulab kothari on master plan of rajasthan
राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस संगीत लोढ़ा व जस्टिस अरुण भंसाली की विशेष खंडपीठ कोर्ट संख्या-4 में प्रदेश के छह शहरों से जुड़े मास्टरप्लान की अनदेखी के मामले में 4 अक्टूबर को अधूरी रही सुनवाई फिर मंगलवार दोपहर 2 बजे होगी। राजस्थान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी व अन्य की ओर से दायर जनहित याचिकाओं में 8 अगस्त 2017 को जारी निर्देशों की पालना रिपोर्ट पूरी तरह पेश नहीं हो सकी थी।
पिछली सुनवाई में रिपोर्ट पेश करते समय खंडपीठ ने पालना के तरीकों पर नाराजगी जताते हुए मौखिक रूप से कहा था कि प्रदेश में हालात खराब होने से तो अच्छा है कि इस पर रोक लग जाए। मामले के न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता एमएस सिंघवी व विनीत दवे ने दो शपथपत्र पेश करते हुए खंडपीठ की ओर से 8 अगस्त को जोधपुर के पावटा सी रोड व नेहरू पार्क रोड पर जारी निर्माण पर जो स्टे लगाया था, उसकी नगर निगम द्वारा अवहेलना करते हुए निर्माण जारी रहने का आरोप लगया था। इस पर भी मंगलवार को बहस होगी। पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से महाअधिवक्ता एनएम लोढ़ा व एएजी राजेश पंवार ने पैरवी की थी।
जोधपुर में मास्टर प्लान की दुर्दशा
जोधपुर में मास्टर प्लान की दुर्दशा का बड़ा नमूना देखना है तो शहर के दक्षिणी जोन यानि बासनी क्षेत्र की उन पांच सड़कों की तलाश करनी होगी, जो मास्टर प्लान में तो हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर गायब है। स्थानीय प्रशासन व जेडीए के अफसरों की ढिलाई कारण मास्टर प्लान में दर्ज सड़कें कहां गई, अफसरों से जवाब तक नहीं दिया जा रहा है। लापता हुई सड़कें बासनी, कुड़ी भगतासनी, रामेश्वर नगर व कृष्णानगर की हैं। इस क्षेत्र को शहर से जोडऩे के लिए 12 साल पहले बनाए मास्टर प्लान में प्रस्तावित 5 सड़कें कागजों में दफन होकर रह गई है। जिसका खामियाजा क्षेत्र की ढाई लाख जनता भुगत रही है।
क्षेत्र के बाशिंदों के जेहन में बड़ा सवाल उभर रहा है कि अब जो तीसरा मास्टर प्लान लागू होगा इसमें इससे पहले वाले मास्टर प्लान में प्रस्तावित सड़कों की स्थिति स्पष्ट की जाएगी या उसे जस का तस छोड़ दिया जाएगा। जिस हाल में पिछले 12 सालों से पाली रोड के एक तरफ करीब 30 कॉलोनियां बस गई। यहां मास्टर प्लान की प्रस्तावित सड़कें एक तरह से गायब ही है। इन सड़कों के रूट की भौतिक स्थिति का पता जेडीए के अफसरों को भी नहीं है। इसलिए इन सड़कों की स्थिति स्पष्ट करने के बारे में इतने सालों में किसी अधिकारी ने कोई कारगर पहल ही नहीं की। यहां के स्थानीय लोग इन सड़कों के लिए लगातार कई बर्षों से संघर्ष कर रहे हैं लेकिन इन कॉलोनियों के लिए जमीन अवाप्त करने वाले कुड़ी भगतासनी हाउसिंग बोर्ड और मास्टर प्लान बनाने वाले जेडीए के जिम्मेदारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
कई हाकिम बदले फिर भी नहीं हुई पहल
इस दौरान कलक्टर सिद्धार्थ महाजन, नवीन महाजन, प्रीतम बी यशवंत, विश्वजीत मलिक और जेडीए आयुक्त जोगाराम, दुर्गेश बिस्सा सहित दर्जनों नेताओं और अफसरों तक लोगों ने इन सड़कों के लिए रास्ते में आ रहे मकानों को मुआवजा देकर रास्ता निकालने की मांगें रखी, लेकिन आज दिन तक कोई सुनवाई नहीं हुई। इससे पता चलता है कि सरकारी महकमे बुनियादी सुविधाओं के लिए कितने उदासीन रहे हैं। यहां के लोग अब भी उम्मीद बनाए बैठे हैं।
Published on:
10 Oct 2017 12:32 pm
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