
ANM Bhanwari devi case
एएनएम भंवरीदेवी अपहरण व हत्या के मामले में एफबीआई की डीएनए एक्सपर्ट अम्बर बी कार की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करवाने के लिए सीबीआई की ओर से पेश प्रार्थना पत्र आदेश जारी किया जाना था, लेकिन आदेश सीबीआई की ओर से कोर्ट से मांगे गए दस्तावेज रिकॉर्ड पर नहीं लेने के कारण आदेश नहीं हो पाया। गौरतलब है कि अनुसूचित जाति जनजाति अदालत में सीबीआई की ओर से इस बारे में दायर प्रार्थना पत्र पर लम्बी बहस के बाद आदेश सुरक्षित रखा गया था।
सुनवाई के दौरान गुरुवार को सीबीआई की ओर से एक पत्र पेश किया गया था, जो कि डीएनए एक्सपर्ट अम्बर बी कार से संबंधित था, लेकिन कोर्ट ने उस पत्र को देखने के बाद सीबीआई को वापस लौटा दिया और अनुपयोगी बताते हुए रिकॉर्ड पर नहीं लिया। सीबीआई ने इस तरह के मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए दो न्यायिक दृष्टान्त पेश किए। साथ ही 21 से 25 अगस्त के बीच गवाही कराए जाने के लिए दो गवाहों की सूची पेश की। बचाव पक्ष की ओर से न्यायिक दृष्टान्त पेश कर बताया गया कि सीबीआई जिन आर्टिकल की बात कर रही है वो सुप्रीम कोर्ट के हैं, जिनमें विवेकाधिकार भी सुप्रीम कोर्ट को ही है। यहां वे आर्टिकल लागू नहीं हो सकते हैं, जिनका लाभ सीबीआई लेना चाहती है।
वहीं इससे पहले एएनएम भंवरी के अपहरण व हत्या मामले में बुधवार को एससी एसटी कोर्ट में किसी तरह की गवाही नही हो पाई। वहीं अदालत में सीबीआई की ओर से डीएनए एक्सपर्ट अम्बर बी कार की गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये करवाने के प्रार्थना पत्र पर लम्बी बहस के बाद आदेश सुरक्षित रखा है, लेकिन साथ ही सीबीआई को वे दस्तावेज पेश करने के भी निर्देश दिए हैं जिसमें सीबीआई व इन्टरपोल के बीच अम्बर कार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही करवाने की सलाह दी गई थी।
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता हेमंत नाहटा व संजय विश्नोई ने पक्ष रखते हुए कहा कि गवाह को समन भेजा जाता है। समन तामील होना आवश्यक है। अन्यथा आगे की कारवाई के अनुसार जमानती व गैर जमानती वारंट जारी कर गवाह को तलब किया जाता है, लेकिन इस मामले में केवल समन तामील नहीं होने के बाद सीबीआई ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए प्रार्थना पत्र पेश कर दिया, जो विधि सम्मत नहीं है। सीबीआई की ओर से लोक अभियोजक एेजाज खान ने पक्ष रखते हुए कहा कि यह इन्टरपोल का मामला है, ऐसे में अम्बर बी कार की गवाही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ही करवाई जाए।
महिपाल मदेरणा को पेश किया
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश सुरक्षित रखा है, लेकिन कुछ दस्तावेज कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। वही बुधवार को सुनवाई के दौरान पूर्व मंत्री महिपाल मदेरणा अन्य आरोपियों को पेश किया गया, जबकि पूर्व विधायक मलखानसिंह व उनके भाई परसराम कोर्ट में हाजिर नही हुए।
Published on:
11 Aug 2017 12:49 pm
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