
Jodhpur martyr
'शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा।' कवि की इन पंक्तियों के माध्यम से शहीदों की शहादत को याद रखने का संकल्प तो किया जाता रहा है। लेकिन दूसरी ओर भोपालगढ़ विधानसभा क्षेत्र के सालवा कलां गांव में एक शहीद के बुजुर्ग पिता पिछले 16 साल से अपने शहीद बेटे के नाम पर गांव के सरकारी विद्यालय का नामकरण करवाकर शहीद की शहादत की निशानियों को अमर करवाने के प्रयास में सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन अभी तक गांव के विद्यालय का नामकरण शहीद के नाम पर नहीं हो पाया है।
यह दर्द भरी दास्तां है भोपालगढ़ क्षेत्र के सालवा कलां गांव निवासी शहीद निंबाराम डूडी के 75 वर्षीय बुजुर्ग पिता गोरधनराम डूडी की। जो कि अपने बेटे के नाम से सरकारी विद्यालय का नामकरण करवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काट कर थक से गए हैं। गौरतलब है कि सालवा कलां गांव निवासी निंबाराम डूडी भारतीय सेना में 8 ग्रेनेडियर्स में ग्रेनेडियर के पद पर कार्यरत थे। इस दौरान 4 जुलाई 2001 की रात को उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के नारीकूट जंगलों में एक छोटी टुकड़ी द्वारा एक अंबुश लगाया गया था। ग्रेनेडियर निंबाराम एक तुरंत कार्रवाई दल के सदस्य थे जो कि अंबुश पार्टी की मदद के लिए जा रही थी। लेकिन इस दौरान उनके दल पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया और फायरिंग के दौरान उनके एक साथी रेडियो ऑपरेटर की टांग में गोली लग गई।
उस समय ग्रेनेडियर निंबाराम ने खुद की जान को जोखिम में डालते हुए रेडियो ऑपरेटर को एक सुरक्षित स्थान पर ले गए। इस कार्यवाही में आंतकवादियों के फायर से निंबाराम की गर्दन और सिर पर गोली लगी और वे वीरगति को प्राप्त हो गए। इस दौरान साथी जवान की जान बचाने के लिए खुद को कुर्बान कर देने और अदम्य साहस दिखाने के लिए ग्रेनेडियर निंबाराम डूडी को मरणोपरांत सेना मेडल (वीरता) से भी सम्मानित किया गया था। राज्य सरकार के नियमानुसार शहीदों के नाम से सरकारी विद्यालयों के नामकरण किए जाने का प्रावधान है। जिसके तहत शहीद के गांव के सरकारी विद्यालय के नाम के आगे शहीद का नाम जोड़ा जाता है। लेकिन सालवा कलां गांव के सरकारी विद्यालय के नाम के आगे 16 बरस बीत जाने के बावजूद भी शहीद निंबाराम डूडी का नाम नहीं जुड़ पाया है।
इसके लिए शहीद के बुजुर्ग पिता गोरधनराम डूडी बरसों से नामकरण की फाइल लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अभी तक कहीं से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया है। इस संबंध में शहीद के पिता व भाइयों का कहना है, कि एक बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने गांव के प्राथमिक विद्यालय का नामकरण शहीद के नाम से करने की लगभग कार्यवाही भी पूरी कर ली थी, लेकिन वह विद्यालय गांव के उच्च माध्यमिक विद्यालय में मर्ज हो गया। जिसके बाद अभी तक विद्यालय के नामकरण को लेकर कोई कार्यवाही नहीं हो पा रही है। हालांकि इसके लिए ग्राम पंचायत से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा विभाग के उच्चाधिकारियों को अनुशंसा भेजी जा चुकी है। लेकिन बाद में विभाग की ओर से यह कहकर मामला लटका दिया गया, कि उच्च माध्यमिक स्तर के विद्यालय का नामकरण शहीद के नाम से करने के लिए शहीद को सेना मेडल अथवा अतिरिक्त सम्मान मिला हुआ होना जरूरी है।
इस संबंध में शहीद पिता का कहना है कि उनके शहीद बेटे को मरणोपरांत सेना मेडल (वीरता) से सम्मानित भी किया जा चुका है, लेकिन बावजूद इसके विभाग की ओर से गांव के उच्च माध्यमिक विद्यालय का नामकरण उनके शहीद बेटे के नाम से नहीं किया जा रहा है। इसके लिए शहीद के पिता ने शिक्षा विभाग के निदेशालय तक के चक्कर काटने के साथ ही क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधियों विधायक-सांसद से भी मुलाकात करके अपनी पीड़ा बताई है। फिर भी कहीं से भी उनकी कोई मदद नहीं की जा रही है। जिसके चलते अब शहीद का परिवार निराश होने लगा है और उनके दिल में इस व्यवस्था के प्रति नाराजगी भी पनपने लगी है। खांगटा-बुड़किया में भी यही हालात सालवा कलां गांव के शहीद निंबाराम डूडी के साथ ही इसी गांव के एक अन्य विद्यालय का नामकरण भी करीब डेढ़ साल पहले शहीद हुए इस गांव के शहीद सैनिक पाबूराम थोरी के नाम से करने का प्रस्ताव शिक्षा विभाग में लंबित पड़ा है। जिसकी शिक्षा विभाग के स्तर पर अभी तक कोई वंचित कार्रवाई नहीं हो पाई है।
इनके अलावा क्षेत्र के खांगटा गांव के विद्यालय का नामकरण शहीद हड़मानराम चौधरी के नाम से करने एवं बुडकिया गांव के राजकीय विद्यालय का नामकरण सहित भूपेंद्र कालीराणा के नाम से करने का भी प्रस्ताव राज्य सरकार के स्तर पर लंबित पड़ा है और इन सभी गांवों के सरकारी विद्यालयों का नामकरण शहीदों के नाम से किए जाने का इंतजार है। क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि इस संबन्ध में राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश के पूर्व सैनिक कल्याण मंत्री रामनारायण डूडी का कहना है कि क्षेत्र के सालवा कलां, खांगटा व बुड़किया गांव के सरकारी विद्यालयों के नामकरण शहीदों के नाम से किए जाने का मामला मेरे ध्यान में लाया गया है। इसके लिए मैं स्वयं अपने स्तर पर शिक्षामंत्री से मुलाकात करुंगा और इस काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करवाने का प्रयास किया जाएगा।
Published on:
17 Aug 2017 05:23 pm
बड़ी खबरें
View Allजोधपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
