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आनंदपाल, लॉरेंस, केएम के बाद राजस्थान में बनने वाली थी ये गैंग, पुलिस ने यूं धराशायी किए खतरनाक मंसूबे

पुलिस को संदेह- हरेन्द्र व काली ने सप्लाई किए थे हथियार

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gangs of Rajasthan

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मोबाइल व्यवसायी की गोली मारकर हत्या करने के मामले में 16 दिन बाद भी पुलिस मुख्य शूटर तक नहीं पहुंच पाई है। उल्टा इस जांच में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। आनंदपाल , लॉरेंस विश्नोई व कैलाश मांजू की खतरनाक गैंग के बाद अब जोधपुर में एक नई गैंग बनने वाली थी। जिसके मंसूबों पर पुलिस ने समय रहते पानी फेर दिया। इसके अलावा जांच में जुटी पुलिस को संदेह है कि मुख्य शूटर हरेन्द्र व काली ने ही भोमाराम को हथियार सप्लाई किए थे। पुलिस दोनों की तलाश में जुटी हुई है। इधर, वारदात के दौरान रैकी व फरार होने में प्रयुक्त कार चलाने वाले चालक का रिमाण्ड सोमवार को न्यायालय ने बढ़ा दिया। प्रकरण में अब तक पांच जने गिरफ्तार हो चुके हैं।

फायरिंग के बाद कोलायत में छोड़ा था आरोपियों को

सरदारपुरा थानाधिकारी भूपेन्द्र सिंह ने बताया कि मण्डोर रोड पर जनता कॉलोनी कब्रिस्तान के पीछे निवासी फारूख अली (28) पुत्र ईदरीश का रिमाण्ड एक दिन के लिए बढ़ाया गया है। वह गत दिनों गिरफ्तार होने वाले नई सड़क हनुमान भाखरी निवासी विनोद प्रजापत की कार का चालक है। गत 17 सितम्बर की रात मोबाइल व्यवसायी वासुदेव की हत्या से पहले वह विनोद की कार में सरदारपुरा सी रोड मोबाइल दुकान के बाहर पहुंचा था। गोली मारने के लिए उसने कार में रैकी की थी। उसने पूछताछ में खुलासा किया कि यह कार कोलायत में रखी गई है। उसने आरोपियों को उसी क्षेत्र में छोड़ा था। पुलिस का दल मंगलवार को कोलायत जाकर कार बरामद करेगा। इस प्रकरण में पहले से रिमाण्ड पर चल रहे भीमसागर निवासी पूनमचंद विश्नोई व सूरसागर में भोजावतों का बास निवासी हरीश प्रजापत से पूछताछ जारी है। अब तक जांच के आधार पर पुलिस का कहना है कि हरेन्द्र व काली ने ही फायरिंग के लिए हथियार सप्लाई किए थे।

नई गैंग बनने से पहले ही पकड़ी गई


इधर, मण्डोर थाने के लेनदेन के विवाद में 1.70 लाख रुपए की वसूली न होने पर सूर्या नाम के युवक के परिवार को ठिकाने लगाने की धमकी के मामले में रिमाण्ड पर चल रहे हिस्ट्रीशीटर पवन सोलंकी व रमेश कच्छवाह से पूछताछ जारी है। मंडोर थानाधिकारी मुक्ता पारीक ने बताया कि प्रकरण में थाने के हिस्ट्रीशीटर पवन सोलंकी व राहुल से पूछताछ जारी है। पुलिस ने समय रहते इन्हें गिरफ्तार कर लिया। ये लोग इस क्षेत्र में नई गैंग बनाने की फिराक में थे। प्रकरण में रामेश्वर टाक व हिमांशु कच्छवाह न्यायिक अभिरक्षा में है। पूछताछ में यह तथ्य सामने आया कि 1.70 लाख रुपए न देने पर उसने सूर्या उर्फ सूर्यप्रकाश को ठिकाने लगाने के लिए राहुल कच्छवाह को निर्देश दिए थे।