
aruna roy in jodhpur
विधिवेत्ता मरुधर मृदुल की स्मृति में मृदुल लीगेसी व बखतसागर नेहरू पार्क नागरिक मंडल के तत्वावधान में सोमवार को कल्पतरु सिनेमा हॉल में आयोजित व्याख्यानमाला में मुख्य अतिथि रोमन मैग्ससे अवॉर्ड विजेता समाजसेविका अरुणा रॉय ने कहा कि मरुधर मृदुल को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमारी बहुत मदद की। उन्होंने कहा कि आप वोट देकर घर बैठ जाएं, अपने हकों के लिए लड़कर उसे काम में लें। लोकतंत्र और कानून को बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी यही है।
समझदार सरकार वही, जो विषमताएं कम करने की कोशिश करे
अरुणा रॉय ने कहा कि समझदार सरकार वही है, जो विषमताओं को कम करने की कोशिशों को प्राथमिकता दे। ये देश सांप्रदायिक न बनें और हमें तोडऩे के लिए अनेक षड्यंत्र है तो जोडऩे के लिए संविधान है। उन्होंने जनहित याचिकाओं का जिक्र कर सूचना के अधिकार की बात करते हुए कहा कि सभी सरकारी योजनाओं में सोशल ऑडिट होना चाहिए। हमारे संविधान प्रदत कानूनों ने सिखाया है कि स्वर्ग मिले ना मिले उस रास्ते पर चलते जाओ जो स्वर्ग की ओर ले जाता है।
मरुधर मृदुल से बहुत कुछ सीखा
उन्हांेंने कहा कि राजस्थान की धरती पर आकर मैंने मरुधर मृदुल से बहुत कुछ सीखा है। यहां की एक खूबी है कि हम एक-दूसरे की बात सुन रहे हैं। राजस्थान सूचना के अधिकार के लिए जाना जाता है। हम मरुधर मृदुल के नाम से एक दूसरे से वादा करते हैं कि इस पहचान को धूमिल नहीं होने देंगे।
मृदुल के संघर्ष को किया याद
सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने कहा कि १९८५ में न्यूनतम मजदूरी का अधिकार आंदोलन की शुरुआत हुई। जब मनरेगा आया तो मस्टररोल दिखाओ आंदोलन शुरू हुआ। इसमें सूचना का अधिकार आधार बना। इस आंदोलन की न्यायिक लड़ाई में मरुधर मृदुल का सहयोग मिला। किशनलाल गर्ग ने मरुधर मृदुल के जीवन से जुड़े प्रसंग सुनाए। राजस्थान हाइकोर्ट के जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास ने मरुधर मृदुल के शोषितों के लिए किए जाने वाले संघर्ष को याद किया।
Published on:
23 Jan 2018 12:00 pm
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