
doctors strike in jodhpur
प्रदेश में पिछले तीन दिन से जारी सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गर्भवती महिलाओं को चिकित्सालय में भर्ती नहीं करने के कारण परिजनों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। बुधवार को झंवर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में प्रसव के लिए रेखा पत्नी पुखराज मेघवाल दर्द से कराहती रही, लेकिन चिकित्सक नहीं होने के कारण कर्मचारियों ने उसे भर्ती नहीं किया। महिला के परिजन कर्मचारियों के आगे गुहार लगाते रहे, लेकिन कर्मचारियों ने चिकित्सकों की हड़ताल का हवाला देते हुए महिला को भर्ती नहीं किया। ऐसे में महिला को परिजन जोधपुर लेकर रवाना हुए, लेकिन रास्ते में ही प्रसव हो गया। गौरतलब है कि गांवों से जोधपुर जाने वाली सड़कों की हालत खस्ता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं के लिए यह सफर और भी जोखिम भरा साबित हो रहा है।
दो घंटे वेंटिलेटर पर रहे अस्पताल
सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल के समर्थन में डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट डॉक्टर्स ने तीसरे दिन बुधवार सुबह 9 से 11 बजे तक कार्य का बहिष्कार किया। वहीं सुबह अस्पतालों में ग्रामीण व संभाग भर से आए मरीजों की आउटडोर में लंबी-लंबी कतारें नजर आई। लंबी लाइनों के कारण मरीज भी बेहाल नजर आए। हालांकि सुबह एक बार महात्मा गांधी, उम्मेद और मथुरादास माथुर अस्पताल में मरीजों की देखभाल की व्यवस्था वेंटिलेटर पर आ गई। वहीं डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल ने बुधवार को सभी विभागाध्यक्षों की मीटिंग ली। साथ ही आसपास के वार्डों को एक यूनिट बना कर चिकित्सक शिक्षकों को व्यवस्था बनाने के लिए कहा।
संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल एमडीएम बेहाल
एमडीएम में रेजीडेंट चिकित्सकों की हड़ताल के कारण मरीज कम होने लग गए हैं। आम दिनों में भारी भीड़ नजर आने वाले एमडीएम अस्पताल में तीसरे दिन मरीजों की संख्या कम हो गई। अस्पताल से मिले आंकड़ों के मुताबिक अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या मंगलवार को 3542 थी। जनाना विंग में मरीजों की संख्या 295 रही। वहीं बुधवार को यह संख्या 2879 रही। जनाना विंग में यह आंकड़ा घटते हुए 250 तक पहुंच गया। रात के समय भी अस्पताल के कई वार्ड खाली नजर आए।
एमजीएच में वार्ड खाली
हड़ताल के कारण महात्मा गांधी अस्पताल में भी कई वार्ड खाली हो गए। माना जा रहा है कि कई गंभीर रोगियों को परिजन छुट्टी दिलाकर चले गए। हालांकि यहां संभालने के लिए अभी सहायक आचार्य, सहआचार्य, आचार्य व वरिष्ठ आचार्य डॉक्टर हैं।
इंटन्र्स व एमबीबीएस फाइनल इयर के मेडिकोज लगाए
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्षों की बुधवार को प्रिंसिपल डॉ. अमिलाल भाट ने मीटिंग ली। इस दौरान आसपास के वार्डों को एक यूनिट बना कर सहायक आचार्य लगाने के लिए कहा। इसके अलावा अस्पताल में एमबीबीएस के 81 इंटन्र्स व 126 फाइनल इयर के मेडिकोज भी महात्मा गांधी, एमडीएम और उम्मेद अस्पताल में लगाए गए हैं। ताकि रेजीडेंट चिकित्सकों के सामूहिक अवकाश तक व्यवस्था बनी रहे। अस्पताल में सीसीयू,आईसीयूू और इमरजेंसी वार्डों में सहायक आचार्य लगाए गए हैं। हालांकि अस्पताल की कुछ इमरजेंसी सेवाओं में रात 8 बजे के बाद कई रेजीडेंट डॉक्टर्स सहायक आचार्यों के आने का इंतजार करते रहे, लेकिन वे समय पर नहीं पहुंचे।
हड़ताल के कारण आनाकानी, 20 वर्षीय स्वाइन फ्लू रोगी भर्ती
एमडीएम अस्पताल में 20 साल के युवक को स्वाइन फ्लू की पुष्टि होने पर भर्ती कराया गया है। जानकारी अनुसार इस रोगी को सुबह रेजीडेंट चिकित्सकों की हड़ताल के कारण भर्ती करने में आनाकानी हुई थी। बाद में प्रभावशाली लोगों के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल प्रशासन ने भर्ती कर दिया। यह रोगी प्रतापनगर का है। मरीज को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया है। जिसकी हालत फिलहाल ठीक है।
उम्मेद इमरजेंसी में गायनी चिकित्सक नहीं
उम्मेद अस्पताल मेंं रेजीडेंट चिकित्सक हड़ताल के बाद महज एक चिकित्सक शिशुओं की देखभाल करता नजर आया। यहां माएं बच्चों को गोदी में लिए बेहाल दिख रही थी कि कब उनके लाल को चिकित्सक देखेंगे। अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति विभाग की कोई चिकित्सक तैनात नजर नहीं आई, जबकि यह शिकायत कई बार आती है। अगर ऐसे में लेबर रुम में महिलाओं को देखा भी जाता है तो यह व्यवस्था अस्पताल प्रशासन के लिए शर्मनाक है। एमडीएम के बाद सर्वाधिक अव्यवस्था उम्मेद अस्पताल में देखी जाती है।
सफाई व्यवस्था दुरुस्त करवाने में नाकाम रहे डॉ.भाट
डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. अमिलाल भाट अधीनस्थ अस्पतालों में सफाई व्यवस्था बनाने में नाकाम रहे। अस्पताल प्रशासन को सफाई मामले में कई बार फटकार पड़ती रही। हालात यह हुए कि अस्पतालों में साफ-सफाई की व्यवस्था को लेकर कोर्ट तक को हस्तक्षेप करना पड़ा।
सफाई व्यवस्था के मामले में ज्यादात्तर वार्डों की हालत बदतर थी, प्रशासनिक अधिकारियों को यह कमी निरीक्षण के दौरान भी सामने आई। इसके साथ अस्पतालों में लगातार सीनियर चिकित्सक शिक्षकों के आउटडोर में नहीं बैठने की शिकायतें रही। एमडीएम अस्पताल में बढ़ती भीड़ को नियंत्रण करने के लिए भी प्रभावी कदम नहीं उठा पाए। जिसका भी समाधान वे नहीं करवा पाए। उन्होंने अपने कार्यकाल में एमडीएम और उम्मेद के अधीक्षक भी बदले। इसके बाद आए अस्पताल के अधीक्षक स्वयं पद पर नहीं रहना चाह रहे थे। उन्हीं के कार्यकाल में उम्मेद अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में डॉक्टर्स के आपसी झगड़े का वीडियो वायरल हुआ।
Published on:
09 Nov 2017 10:05 am
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