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वेतन कटौती के बाद पुलिस ने धरा था अपराधियों का रूप और दिया था ऐसे कांड को अंजाम… हैरानी में डालेगी ये खबर

शार्प शूटर हरेंद्र को पकडऩे के लिए जोधपुर पुलिस ने धरा था अपराधी का रूप
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जोधपुर

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Nidhi Mishra

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Updated: 19 Oct 2017, 3:03 PM IST

Police disguised to arrest shooter harendra accused in firing

Police disguised to arrest shooter harendra accused in firing

राज्य की पुलिस भी बदमाशों की धरपकड़ व वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए संचार क्रांति व तकनीकी युग में ्रमोबाइल पर निर्भर है। इसी वजह से मुखबिर व सूचना तंत्र वाली पुरानी पुलिसिंग से वर्तमान पुलिस कोसों दूर हो गई है। रंगदारी के लिए गोलियां चला कर दहशत फैलाने वाले लॉरेंस के गुर्गों ने आधुनिकता के दौर में पुलिस के इस हथियार का तोड़ निकाल लिया और विदेशी नम्बर से व्हॉट्सअप कॉलिंग से गिरोह चलाने लगे। वे थोड़े-थोड़े दिन के अंतराल में विदेशी नम्बर ही नहीं, मोबाइल भी बदल रहे थे। पुलिस को इन्हें पकडऩा बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया था।

यही वजह है कि साढ़े सात माह तक पुलिस शूटर को पकड़ पाना तो दूर, उनके पास तक नहीं पहुंच पा रही थी। ऐसे में पुलिस ने एक बार फिर पुरानी पद्धति यानी मुखबिर व सूचना तंत्र विकसित करने पर जोर दिया। उसी के बूते पर पुलिस हरेंद्र तक पहुंच पाई।

क्लीन शेव वाली पुलिस ने बढ़ाईं दाढ़ी व मूंछें

लॉरेंस के शूटर तक पहुंचने के लिए पुलिस ने खुद के विभाग से ऐसे सिपाहियों को ढूंढ-ढूंढ कर सूचनाएं संकलित करने में लगाया। हमेशा क्लीन शेव रहने वाले पुलिस के कई सिपाहियों ने अपराधियों के गिरोह में घुस पैठ करने और अपराधी जैसा दिखने के लिए दाढ़ी मूंछें तक बढ़वा लीं, ताकि वे अपराधियों से घुल मिल कर सूचनाएं ला सकें।

सिर्फ एक पुख्ता सूचना की दरकार थी और वो मिल गई

पुलिस कमिश्नर अशोक राठौड़ का कहना है कि हरेंद्र जाट, काली राजपूत व भोमाराम पुलिस से बचने के लिए व्हॉट्सअप कॉलिंग की मदद ले रहे थे। इसका तोड़ निकालने के लिए मुखबिर तंत्र विकसित किया गया। इसके लिए विभाग के पुराने सिपाहियों को तैयार किया गया। सिर्फ एक पुख्ता सूचना का इंतजार था और उसी से सफलता मिल गई।

शातिर इतना कि साथियों को भी नहीं थी भनक

अवैध वसूली के लिए फायरिंग करके दहशत फैलाने के मामले में पुलिस अब तक लॉरेंस विश्नोई व उसके कई गुर्गों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनसे हरेन्द्र व काली जाट के बारे में सख्त पूछताछ की गई, लेकिन कोई भी उसके बारे में सूचना नहीं दे पाया था।

मां के साथ कई महीने जोधपुर में रहा अनमोल

सूत्रों की मानें तो पंजाब में गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई के कारण उसके परिवार को जान का खतरा उत्पन्न होने लगा था। ऐसे में उसकी मां व भाई अनमोल जोधपुर आकर किराए के मकान में रहने लगे थे। दोनों कई दिन तक आबूरोड भी रहे थे। जोधपुर में रहने के दौरान ही लॉरेंस के कुछ गुर्गे जोधपुर जेल में बंद रहे थे। पुलिस को अंदेशा है कि रंगदारी के लिए गोलियां चलाने में अनमोल की भूमिका हो सकती है।

सहपाठी से कड़ी पूछताछ
पुलिस ने हरेन्द्र तक पहुंचने के लिए हर प्रकार से हाथ-पांव मारे। हरेन्द्र के पुराने मित्रों से लेकर उसके साथ पढऩे वालों तक से पूछताछ की। सेतरावा निवासी गोपाल सिंह भी हरेन्द्र का सहपाठी व मित्र रह चुका है। इसे पुलिस ने कई दिन से पकड़ रखा है। पुलिस उससे हरेन्द्र का सुराग उगलवाने के साथ ही हथियार बरामद करने का प्रयास में थी।