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जोधपुर: अब सीनियर डॉक्टर्स ने भी किया कार्य बहिष्कार, इलाज के लिए दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर मरीज

जोधपुर के सीनियर डॉक्टर्स के कार्य बहिष्कार के बाद अब मरीज इलाज के लिए दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।

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senior doctors too on strike now in Jodhpur

senior doctors too on strike now in Jodhpur

प्रदेश के सेवारत चिकित्सकों और रेजिडेंट डॉक्टर्स की पिछले 8 दिनों से चली आ रही हड़ताल में सोमवार को मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने भी एक घंटे का कार्य बहिष्कार किया। जोधपुर स्थित डॉक्टर संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने सुबह नौ से दस बजे तक आउट डोर का बहिष्कार कर दिया। सरकारी छुट्टी होने से आउट डोर केवल 2 घंटे का ही था। ऐसे में मरीजों को केवल 1 घंटे का ही समय मिल पाया। डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार की वजह से अधिकांश मरीजों ने निजी अस्पतालों का ही रुख करना बेहतर समझा।

उधर, सेवारत चिकित्सकों और मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से अब सरकारी अस्पताल धीरे-धीरे खाली होने लग गए हैं। मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल और सैटेलाइट अस्पताल के वार्डों में बेड सूने पड़े हैं। मरीजों ने निजी अस्पताल की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। उधर सरकार की ओर से प्रदेश में रेस्मा लागू होने की वजह से अधिकांश डॉक्टर भूमिगत है। सरकार और डॉक्टरों की इस खींचतान में सर्वाधिक नुकसान मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज में चल रही रेजीडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के कारण मथुरादास माथुर, महात्मा गांधी और उम्मेद अस्पताल में व्यवस्थाएं हांफने लगी है। वहीं 18 दिसंबर से शुरू हुई हड़ताल के दौरान रविवार शाम तक 104 मरीजों की मौत हो गई। हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि कोई भी मौत इलाज के अभाव में नहीं हुई है, उसके बावजूद रेजीडेंट चिकित्सकों की हड़ताल से कहीं न कहीं शहर के बड़े अस्पतालों में चिकित्सकीय व्यवस्था कमजोर हुईं है। अस्पताल में भर्ती मरीजों की जान भी सांसत में आ चुकी है। पूर्ण रूप से पूरी जिम्मेदारी सीनियर्स डॉक्टर के भरोसे है। वहीं रविवार के आंकड़ों के मुताबिक हड़ताल के दौरान मथुरादास माथुर अस्पताल में 9 और महात्मा गांधी अस्पताल में 2 मरीजों की मौत हो गई।

मथुरादास माथुर अस्पताल में सोमवार को क्रिसमस का अवकाश होने के चलते अस्पताल के ओपीडी काउंटर बंद रहे। इससे अस्पताल में बाहर से आने वाले मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं ओपीडी वार्ड बंद होने से अस्पताल के ट्रोमा सेंटर स्थित इमरजेंसी वार्ड में इलाज करवाने आए मरीजों की भीड़ लग गई।

राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र देचू में चिकित्सकों की हड़ताल के चलते मरीजों को भारी परेशानी हो रही हैं। चिकित्सा विभाग ने आयुर्वेद विभाग के चिकित्सक को व्यवस्था के लिए लगाया गया था, लेकिन वे भी पिछले तीन दिनों से अस्पताल में नहीं आ रहे हैं। इससे अस्पताल में आने वाले मरीजों को परेशानी हो रही है। दिनभर मरीज इधर-उधर भटक रहे हैं। सीएचसी में सन्नाटा पसरा हुआ है।

वहीं सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल के चलते फलोदी के राजकीय चिकित्सालय में व्यवस्थाएं पूरी तरह से गड़बड़ा गई है। अब मरीजों को इलाज के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। सोमवार को चिकित्सालय में मात्र दन्त चिकित्सक डॉ. सुनील विश्नोई ही सेवाएं दे रहे थे। साथ ही व्यवस्थाओं के तहत नियुक्त चिकित्सक का स्वास्थ्य खराब होने के कारण वे भी छुट्टी पर चले गए। लिहाजा अस्पताल में आने वाले मरीज पंजीकरण काउंटर से ही लौट गए। आज सुबह अस्पताल खुलते ही काफी मरीज आए और डॉक्टर्स के आने का इंतजार भी किया, लेकिन डॉक्टर नहीं आते देख मरीज थककर चले गए। जिससे आज ओपीडी पंजीकरण कोई भी पर्ची नहीं कटी। अब चिकित्सालय में आने वाले सामान्य बीमारियों के मरीजों के उपचार की भी कोई व्यवस्था नहीं है। अब विभाग व सरकार द्वारा यहां वैकल्पिक तौर पर चिकित्सक नियुक्त करने की आवश्यकता है, ताकि मरीजों को कुछ राहत मिल सके।


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