
जोधपुर
भारतीय ही नहीं, विश्व सिनेमा के लिए भी यह सदमे और दुख भरी घड़ी थी, जब फिल्मी पर्दे की परी श्रीदेवी ने दुबई में दुनिया से हमेशा के लिए पर्दा कर लिया। श्रीदेवी का निधन होने के बाद उनकी पार्थिव देह जब दुबई से मुंबई लाई जा रही थी । राजस्थान और विशेषकर मरुधरा के फिल्म प्रेमी दर्शक भी बहुत गमगीन थे। वे उनसे जुड़ी खबरों के लिए टीवी चैनल्स और सोशल साइट्स पर बराबर नजरें जमाए रहे। अपनी प्रिय अदाकारा की आखिरी विदाई की वेला के सीन देख कर प्रशंसकों की आंखें भीग उठीं।
धोरों में खनकी थीं श्रीदेवी की चूडि़यां
उनकी मधुर यादें मरुधरा से भी जुड़ी रहीं। श्रीदेवी न सिर्फ फिल्म लम्हे की शूटिंग के
सिलसिले में मरुधरा आई थीं और उन पर धोरों में मोरनी बागा में बोले आधी रात मां, छनन नन चूडि़यां खनक गईं रे देख बालमा नगमा फिल्माया गया था, बल्कि वे बिजनेसमैन किशोर लुल्ला की बेटी रिशिका की शादी के सिलसिले में जोधपुर आई थीं और यहां उम्मेद भवन पैलेस में हुए भव्य शादी समारोह में पति बोनी कपूर के साथ सम्मिलित हुई थीं।
श्रीदेवी के साथ यादगार लम्हे
राजस्थान की गायिका व अदाकारा सिंगर इला अरुण की उनसे कई यादें जुड़ी हैं। वे जब रविवार को जोधपुर आईं तो उन्होंने कहा था कि उन्होंने श्रीदेवी के साथ लम्हे फिल्म की शूटिंग जैसलमेर में की थी और उनकी जिंदगी का यादगार और बहुत महत्वपूर्ण लम्हा था। श्रीदेवी के देहांत से हमारे बॉलीवुड में बहुत ही दुख का दिन है। इला ने कहा कि आज सारे लोग बहुत दुखी हैं। इतनी अच्छी कलाकार आज हमारे बीच से चली गई है । यह बहुत ही दुख की बात है।
अदाकारा श्रीदेवी
श्रीदेवी का जन्म 13 अगस्त 1963 को श्रीअम्मा येंजर अय्यपन के यहां हुआ था। वे एक महान हिन्दुस्तानी अदाकारा थीं, जिन्होंने तमिल, मलयालम, तेलुगू, कन्नड़ और हिन्दी सिनेमा में काम किया था। श्रीदेवी को पांच फिल्मफेयर पुरस्कार मिले थे। सन 1980 और 1990 के दशक में दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली श्रीदेवी सबसे ज्यादा मेहनाता पाने वाली अदाकाराओं में से एक थीं। उन्हें उस दौर की सबसे ज्यादा शोहरत पाने वाली अदाकारा माना जाता है। भारत सरकार ने उन्हें 2013 में पदमश्री से नवाजा था।
उन्होंने 1975 की फिल्म जूली से हिन्दी सिनेमा में बाल अभिनेत्री के रूप में प्रवेश किया था। अपनी पहली फिल्म मून्द्र्हु मुदिछु नामक तमिल में थी। श्रीदेवी ने सन 1978 की फिल्म सोलहवां सावन फिल्म से हिन्दी पिुल्म इंडस्ट्री में डेब्यू किया था, लेकिन उन्हे सबसे अधिक पहचान 1983 की फिल्म हिम्मतवाला से मिली। सदमा, नागिन,निगाहें, मिस्टर इंडिया, चालबाज़, लम्हे, खुदा गवाह और जुदाई उनकी मशहूर फिल्में रहीं।
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