वरिष्ठ अधिवक्ता व बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के पूर्व चेयरमैन जगमालसिंह चौधरी सहित अधिकतर वकीलों ने राजस्थान सरकार का यह फैसला भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला माना। साथ ही कहा कि सीआरपीसी की धारा 156 (3 ) में संशोधन से जहां भ्रष्ट लोकसेवकों को संरक्षण मिलेगा। धारा 228 बी से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होगा। अधिवक्ता केके व्यास, गजेंद्रसिंह राठोड़, पवन रांकावत, जितेंद्र विश्नोई, अतुल ढाभोल, आकाश पुंगलिया, गजेंद्र मेहता, सुनील व्यास, रतनलाल सारस्वत, बिजयसिंह, अशोक परिहार, शेरसिंह, भुवनेश छंगाणी व पुखदास सहित कई अधिवक्ताओं ने इस विधियेक को काला कानून बताया।