
Sumita Mahajan statement on Rajasthan ordinance
राजस्थान में लोकसेवकों को बचाने के लिए लाए जा रहे विधेयक को जहां आमजन सहित सभी राजनीतिक पार्टियां काला कानून बता रहीं हैं। इस बीच, इस बारे में जब लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह विधेयक राजस्थान का है। इस बारे में राजस्थान सरकार ही जाने।
लोकसभा अध्यक्ष महाजन मंगलवार शाम 4.15 बजे वायुयान से जोधपुर पहुंचीं। वहां से सर्किट हाउस में आई। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में लोकसभा में विपक्ष की आवाज दबाए जाने के बारे में कहा कि बोलने की आजादी सभी को है। चिल्लाने व हंगामा करने की किसी को नहीं है। उन्होंने कहा कि वे रामदेवरा के दर्शन के लिए आई हैं। इससे पहले सर्किट हाउस में लोकसभा अध्यक्ष को पुलिस के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं और विभिन्न महिला संगठनों ने इनका स्वागत किया। केन्द्रीय राज्यमंत्री पीपी चौधरी भी उनसे मुलाकात करने पहुंचे।
156(3) में संशोधन से भ्रष्ट लोक सेवकों को संरक्षण मिलेगा
वहीं राजस्थान उच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं ने राज्य सरकार की ओर से भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता की कुछ धाराओं में संशोधन का विधेयक लाने पर विरोध दर्ज करवाया है। पांच दिन के बाद सोमवार को अदालतें खुलने पर वकीलों ने दीपावली बधाई के साथ ही सीआरपीसी में संशोधन पर आक्रोश प्रकट किया।
वरिष्ठ अधिवक्ता व बार कौंसिल ऑफ राजस्थान के पूर्व चेयरमैन जगमालसिंह चौधरी सहित अधिकतर वकीलों ने राजस्थान सरकार का यह फैसला भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला माना। साथ ही कहा कि सीआरपीसी की धारा 156 (3 ) में संशोधन से जहां भ्रष्ट लोकसेवकों को संरक्षण मिलेगा। धारा 228 बी से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होगा। अधिवक्ता केके व्यास, गजेंद्रसिंह राठोड़, पवन रांकावत, जितेंद्र विश्नोई, अतुल ढाभोल, आकाश पुंगलिया, गजेंद्र मेहता, सुनील व्यास, रतनलाल सारस्वत, बिजयसिंह, अशोक परिहार, शेरसिंह, भुवनेश छंगाणी व पुखदास सहित कई अधिवक्ताओं ने इस विधियेक को काला कानून बताया।
आखिर क्या है इस बिल में...
इस बिल के मुताबिक, प्रदेश के सांसद, विधायक, जज और अफसरों के खिलाफ जांच करना काफी मुश्किल हो जाएगा, जबकि इन लोगों पर पर शिकायत दर्ज कराना आसान नहीं रहेगा। इसके अलावा दागी लोकसेवकों को दुष्कर्म पीडि़ता वाली धारा में संरक्षण, कोर्ट के प्रसंज्ञान लेने से पहले नाम-पता उजागर तो दो साल सजा, अभियोजन स्वीकृति से पहले मीडिय़ा में किसी तरह की कोई रिपोर्ट आई तो इसमें सजा का प्रवधान के साथ कड़ा जुर्माना भी है। जबकि इन लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए सरकार 180 दिन में अपना निर्णय देगी। इसके बाद भी अगर संबंधित अधिकारी या लोकसेवक के खिलाफ कोई निर्णय नहीं आता है, तो अदालत के जरिए इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई जा सकेगी।
Published on:
25 Oct 2017 11:25 am
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