
terrorism changed the fly way of migratory birds
सर्दियों में यूरोपियन देशों से भारत प्रवास के लिए आने वाले पक्षियों ने अपने फ्लाई-वे में बहुत बड़ा बदलाव किया है। बरसों से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के ऊपर उड़ान भरने वाले ये पक्षी अब अरब सागर के ऊपर से भारत में प्रवेश कर रहे हैं। इसमें फ्लेमिंगो, शावलर, मलार्ड, टिल, पिंकटैल और डक्स शामिल हैं।
पूरे विश्व में प्रवास के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए पक्षी विभिन्न फ्लाई वे का इस्तेमाल करते हैं। पक्षियों को यह जानकारी उनके पूर्वजों से विरासत में मिलती है। यूरोप से भारत प्रवास के लिए आने वाले पक्षी एशियन-यूरोपियन फ्लाई वे का इस्तेमाल करते हैं, जो यूरोप से भारत को जोड़ता है। स्पेन से टफलर, नॉर्दन शावलर, मलार्ड सहित कई प्रकार की बतखें और स्कंडवेनिया से वाडर्स पक्षी प्रवास करते हैं। ये पक्षी यूरोप से तुर्की के ऊपर से एशिया में प्रवेश करते हैं। यहां से सीरिया, इराक, ईरान के बाद अदन की खाड़ी के ऊपर से होते अफगानिस्तान और पाकिस्तान को बाईपास कर देते हैं। इसके बाद अरब सागर होते हुए भारत में प्रवेश करते हैं।
तालिबान और कबाइली करते हैं शिकार
यूरोप से आने वाले पक्षी अब तक ईरान के बाद अफगानिस्तान और पाकिस्तान फ्लाई-वे का इस्तेमाल कर भारत में प्रवेश करते थे। अफगानिस्तान में बरसों से तालिबानी हमलों से बारूद, बंदूकों की आवाजें और पक्षियों के झुण्ड पर लगातार हो रहे हमलों से पिछले करीब दो दशक में पक्षियों ने रूट बदल दिया। पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान प्रांत में कबाइली हमलों से भी कई पक्षी मारे जाते थे। अपने साथियों को लगातार मरते देख फ्लेमिंगों सहित अन्य पक्षी अब समुद्री फ्लाई-वे का इस्तेमाल करने लगे। ये पक्षी तुर्की के बाद लेबनान रूट पर आते हैं। सीरिया में पिछले पांच सालों से चल रही अशांति की वजह से लेबनान में लाखों सीरिया विस्थापित जमा हो गए हैं और वे आसमान में उड़ान भर रहे प्रवासी पक्षियों के झुण्ड पर हमला करते हैं। इससे कई पक्षियों की प्रजातियां खतरे में पड़ गई है।
होबरार बस्टर्ड को नहीं छोड़ा
ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के साथ होबरार बस्टर्ड अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत में पाया जाने वाला पक्षी हैं, जो अफगानिस्तान से भारत के जैसलमेर , बाड़मेर, जोधपुर , कच्छ और गुजरात में प्रवसन पर आता है। इनमें होबरार बस्टर्ड की संख्या में भी भारी गिरावट आई है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान में इसको भी मारा जा रहा है।
फ्लाई-वे बदला
भारत प्रवास पर आने वाले पक्षी मुख्यत: साउथ-ईस्ट एशियन फ्लाई वे, ईस्ट-ईस्ट एशियन फ्लाई वे और एशिया-यूरोपियन फ्लाई वे का इस्तेमाल करते हैं। यूरोपियन फ्लाई वे में अफगानिस्तान और पाकिस्तान से पक्षियों की लगातार हो रही मौतों के बाद उन्होंने इस रुट को बदल दिया है। -डॉ. संजीव कुमार, प्रभारी, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण
Published on:
30 Dec 2017 11:44 am
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