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गांव-ढाणी से शहर तक सब जीम रहे दाल, बाटी, चूरमा. तो जानिए घर में कैसे बनाएं यह स्वादिष्ट व्यंजन

अपनी सांस्कृतिक विरासत व अनूठे खानपान के लिए जाने जाने वाला जोधपुर यहां की दाल बाटी और चूरमे के लिए भी विशेष रूप से पहचाना जाता है।

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गांव-ढाणी से शहर तक सब जीम रहे दाल, बाटी, चूरमा.  तो जानिए घर में कैसे बनाएं यह स्वादिष्ट व्यंजन

जोधपुर की दाल बाटी और चूरमा.

बासनी (जोधपुर).
अपनी सांस्कृतिक विरासत व अनूठे खानपान के लिए जाने जाने वाला जोधपुर यहां की दाल बाटी और चूरमे के लिए भी विशेष रूप से पहचाना जाता है। आज गांव गुवाड़ से लेकर शहर के हर बड़े चौराहे एवं संकरी गली में भी आपको दाल बाटी चूरमे की दुकान मिल ही जाएगी। अपने खानपान व सुडोल शरीर के लिए जाने जाना वाले मारवाड़ी भले ही दिसावर जाए या खेत में काम करे सप्ताह या माह में एक आध बार दाल बाटी या चूरमा नहीं खाता तब तक उसका मन यह मानने को तैयार नहीं कि उसने कुछ खाया है। आज भले ही शहर में दाल बाटी व चूरमे की सैकड़ों दुकानें खुल गई हैं लेकिन यहां के बाशिन्दे समय निकालकर अपनें घरों में दाल बाटी व चूरमा जरूर बनाते हैं। पाकशाला की समृद्ध परंपरा के अनुसार सिर्फ शहर ही नहीं गांवों में आज भी कोयले के अंगारों पर बाटी की खुशबू खेतीहरों की भूख और भी बढ़ा देती है। ऐसे में आज हम आपको दाल बाटी और चूरमे के बारे में जानकारी उपलब्ध करवा रहे हैं।

ऐसे बनाएं बाटी
इसके लिए सबसे पहले आटा, घी, थोड़ी सूजी, बेकिंग सोडा आदि काम में लेते हैं। यदि बाटी को केवल दाल के साथ ही खाना है तो आटे में नमक मिला सकते हैं। सबसे पहले आटे में थोड़ा घी, थोड़ी सूजी, बेकिंग सोडा आदि लेकर आटे को दूध या पानी के साथ अच्छी तरह गूंथ दें। बाटी के लिए थोड़ा मोटा पीसा हुआ आटा काम में लें जिससे बाटी दरदरी बन सके। आटा गूंथते समय ध्यान रखें कि उसमें पानी या दूध कम ही मिलाएं ताकि वह ज्यादा मुलायम न हो जिससे बाटी बॉल साइज में अच्छी तरह शेप ले सके।

ऐसे पकाएं
बाटी को पारंपरिक रूप से सिघड़ी या कोयले के जलते अंगारों पर पकाया जाता है। इसमें बाटी को जलने से बचाने के लिए थोड़ी-थोड़ी देर में घुमाया जाता है। वहीं घरों में इसे ऑवन में भी पकाया जा सकता है। यदि इसकी सुविधा भी न मिले तो बाटी को बाफले की तरह पकाया जाता है। इसके लिए बाटी को पानी में थोड़ी देर तक गर्म किया जाता है। पकने के बाद जब बाटी पानी में तैरने लग जाए तो उसे बाहर निकाल दें। उसके बाद बाटी को दो या चार टुकड़ों में काटकर घी में हल्का भूरा होने तक तल लें।

यूं तैयार करें दाल
बाटी के साथ ही दाल तैयार करने के लिए मूंग, चना, मोगर आदि दालों को मिलाकर तीन-चार घंटों के लिए भीगों दें। उसके बाद इसे कूकर में दो-तीन सीटी लगने तक गर्म कर दें। यदि दाल को गाढ़ा करना हो तो दाल को अच्छी तरह से घोंट दे। कड़ाही में घी गर्म करें। उसमें जीरा, प्याज, लहसुन, हरी मिर्च आदि का तड़का लगाएं। इसमें नमक, मिर्च, हल्दी, धनिया पाउडर सहित आवश्यकतानुसार मसाले मिलाते हुए बारीक कटे टमाटर मिलाएं। मसालों के अच्छी तरह पकने के बाद घोंटी हुई दाल मिलाकर अच्छी तरह से पकाएं। इसमें हरा धनियां डालकर गरमा गरम परोसें।

ऐसे तैयार करें चूरमा
बाटी का चूरमा वैसे तो देसी तरीके से हाथ से चूर कर इसमें घी, शक्कर आदि डालकर तैयार कर सकते हैं। वहीं इसे मीठे लड्डू का आकार देकर भी खाने में काम में लिया जा सकता है। इसके लिए बाटी को काजू, बादाम आदि सूखे मेवों के साथ मिक्सी में हल्का दरदरा पीस दें। इसमें घी, गुड़ या शक्कर मिलाकर चूरमा बना दें। इसे लड्डू बनाकर भी काम में लिया जा सकता है।

गांवों में लाह व विशेष आयोजनों में तैयार होती है दाल बाटी
मारवाड़ के थार रेगिस्तान में तपा देने वाली गर्मी व ठिठुरती सर्दी में भी यहां के बाशिन्दे भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकू ल खानपान को लेकर विशेष तैयारियां करते हैं। गांवों में कई बार खेती व किसानी कामों में एक-दूसरे के सहयोग के लिए लाह का आयोजन किया जाता है। इसमें आस पास के लोग एकत्र होकर मिल-जुल कर काम करते हैं। कई बार घरों से दूर दराज क्षेत्रों में आयोजित लाह में रोटी आदि बनाने की विशेष व्यवस्था नहीं होती है। ऐसे में कामकाज के साथ कोयले के अंगीरों पर बाटी सेक दी जाती है। दाल बाटी के साथ बाटी को घी में चूर कर चूरमे का आनंद लिया जाता है।

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