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घर में देशप्रेम का माहौल देख कूंची से बनाने लगे महान लोगों की तस्वीरें, जोधपुर की दीवारों पर सजी हैं वॉल पेंटिंग्स

स्वतंत्रता सैनानियों के घर में जन्मे चिन्मय जोशी को बचपन से ही देश के महान लोगों की तस्वीरें बनाने का शौक रहा। इसी का नतीजा है कि शहर और विभिन्न प्रतिष्ठानों की दीवारों पर वह अपने हुनर का जादू बिखेर रहे हैं। रेलवे स्टेशन से खतरनाक पुलिया की ओर जाने वाले मार्ग पर दीवार पर चित्रित वॉल पेटिंग में चिन्मय का भी योगदान है।

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wall painting artist chinmay joshi of jodhpur

घर में देशप्रेम का माहौल देख कूंची से बनाने लगे महान लोगों की तस्वीरें, जोधपुर की दीवारों पर सजी हैं वॉल पेंटिंग्स

जोधपुर. स्वतंत्रता सैनानियों के घर में जन्मे चिन्मय जोशी को बचपन से ही देश के महान लोगों की तस्वीरें बनाने का शौक रहा। इसी का नतीजा है कि शहर और विभिन्न प्रतिष्ठानों की दीवारों पर वह अपने हुनर का जादू बिखेर रहे हैं। रेलवे स्टेशन से खतरनाक पुलिया की ओर जाने वाले मार्ग पर दीवार पर चित्रित वॉल पेटिंग में चिन्मय का भी योगदान है। चिन्मय ने बताया कि उनकी दादी गौरजा देवी जोशी स्वतंत्रता सैनानी थीं। बड़े पिता सुमनेश जोशी व लपसा बेढ़वाड़ और पिता चंपालाल जोशी भी अपनी माता की तरह स्वतंत्रता सैनानी रहे। ऐसे में उन्हें शुरू से ही देशप्रेम की शिक्षा मिली। अपनी कला को लेकर उनके परिजनों ने प्रोत्साहित किया। वह आज कला शिक्षक के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं।

महात्मा गांधी बनाना सर्वाधिक प्रिय
स्वतंत्रा सैनानियों की कहानियां सुन कर बढ़े हुए चिन्मय को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीरें व स्कैच आदि बनाना सर्वाधिक प्रिय है। वह विवेकानंद, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह व रविंद्रनाथ टैगोर सहित कई स्वतंत्रा सैनानियों की पेंटिंग्स दीवारों पर बना चुके हैं। रेलवे की दीवार पर भी उनकी बनाई राव जोधा की पेंटिंग सेल्फी पॉइंट बनी हुई है। इसके अलावा वह विभिन्न प्रकार की पेंटिंग्स भी बनाते हैं।

शिक्षा से संबंधित पेंटिंग्स का शौक
नवचौकिया निवासी जोशी ने बताया कि वह कई स्कूलों में पेंटिंग्स बना चुके हैं। जिससे विद्यार्थियों में देशप्रेम की भावना जागृत हो। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े होने के चलते उन्हें इसी क्षेत्र की पेंटिंग करना अच्छा लगता है। उन्हें स्कैच बनाने में सुकून मिलता है। उन्होंने बताया कि पुष्टिकर स्कूल के प्राचार्य गोविंद पुरोहित, सत्यनारायण दवे और लादूराम ने पेंटिंग के प्रति प्रोत्साहित करते हुए मार्गदर्शन किया है। वह धर्मदास, फौजमल को अपना पसंदीदा कलाकार मानते हैं।