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जोधपुर . रेलवे स्टेशन स्थित राजीव गांधी सहकार भवन पिछले ८ साल से भू-जल के ऊपर आने से पानी पर तैर रहा है। एक महीने पहले जोधपुर में आए भूकम्प के बाद भू-तल पर स्थित सुपर मार्केट सहित अन्य दफ्तरों में कर्मचारियों को बिजली झटके महसूस हुए तो सहकारी भण्डार प्रशासन जागा। भण्डार महाप्रबंधक रामसुख चौधरी ने भवन प्रबंध समिति को पत्र लिखकर अविलम्ब भू-जल खाली करने का निवेदन किया। भवन प्रबंध समिति के कार्यकारी अध्यक्ष व अतिरिक्त रजिस्ट्रार (अपील) प्रदीप जैन और सचिव व अतिरिक्त रजिस्ट्रार (जोधपुर जोन) सोहनलाल लखानी के मध्य भू-जल निवारण कमेटी गठन में अध्यक्षता को लेकर वाद-विवाद हो गया।
राइसेम का अतिरिक्त प्रभार होने से लखानी कमेटी के अध्यक्ष पद से दूरी बनाए रखना चाहते थे, जबकि प्रदीप उन्हें अध्यक्ष बनाने पर तुले हुए थे। विवाद इतना अधिक बढ़ गया कि पत्र व्यवहार को एक तरफ रखकर दोनों अधिकारियों ने आपस में जमकर 'हॉट टॉक' की। अब गेंद जयपुर स्थित सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार व प्रमुख शासन सचिव अभय कुमार के पाले में डाल दी गई है, लेकिन आठ साल बाद भी सहकार भवन से पानी निकालने को लेकर कोई खास योजना नहीं बन पाई।
अब आ रहा है करंट
राजीव गांधी सहकारी भवन में सहकारिता के नौ दफ्तर संचालित होते हैं। वर्ष २००९ में यहां भू-तल में पानी भरना शुरू हो गया। उस समय भू-तल पर संचालित जोधपुर सहकारी उपभोक्ता होलसेल भण्डार के कार्यालय को रातों-रात ही सहकार भवन की दूसरी मंजिल पर शिफ्ट किया गया। इसके बाद यहां लगातार पानी भरा रहता है, जिसकी वजह से भवन की नींव कमजोर हो गई है। बिजली की केबल और कई उपकरण पानी में डूबे हुए हैं। इस पानी में डेंगू और मलेरिया के मच्छर भी पनप रहे हैं। पिछले महीने १८ नवम्बर को जोधपुर में हल्का भूकम्प आया था। इसके बाद भू-तल पर संचालित सुपर मार्केट, पेंशनर्स काउंटर सहित कुछ दफ्तरों के कर्मचारियों को दीवार से करंट के झटके महसूस होने शुरू हो गए। डर के मारे कर्मचारियों ने भण्डार प्रशासन को बताया।
जीएम के पत्र लिखने के बाद शुरू हुआ मामला
भण्डार के महाप्रबंधक रामसुख चौधरी ने सहकार भवन प्रबंध समिति के कार्यकारी अध्यक्ष जैन को पत्र लिखकर पानी खाली करवाने को कहा। जैन ने सचिव लखानी को पत्र लिखकर इसके लिए कमेटी गठित करने के लिए कहा। लखानी ने प्रदीप जैन की अध्यक्षता में डिप्टी रजिस्ट्रार प्रशांत कल्ला व भण्डार जीएम चौधरी की तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। जैन ने इस आदेश को संशोधित करते हुए लखानी को कमेटी का अध्यक्ष बना दिया। लखानी के पास राइसेम जयपुर का अतिरिक्त प्रभार हैं। वे दो दिन जोधपुर रहते हैं और तीन दिन जयपुर। एेसे में उन्होंने अध्यक्ष बनने में असमर्थता जता दी, लेकिन जैन उन्हें ही अध्यक्ष बनाने पर अड़े। आखिर दोनों के बीच पत्र व्यवहार से इत्तर फोन पर हॉट टॉक हुई। जैन ने इस मामले को जयपुर रजिस्ट्रार के पास भेज दिया।
पंप लगाओ, पानी निकालो
मैंने अतिरिक्त रजिस्ट्रार प्रदीप जैन को दो मोटर पंप लगाकर १०-१२ दिन में भू-जल बाहर निकालने के निर्देश दिए हैं। इसमें फाइलें भेजने की कहां जरुरत थी। पंप लगाने से पानी अपने आप बाहर आ जाएगा। आगे की कार्यवाही बाद में करेंगे।
-अभय कुमार, प्रमुख शासन सचिव, सहकारिता विभाग व कार्यवाहक रजिस्ट्रार
मेरे पास राइसेम का अतिरिक्त प्रभार
मैं दो दिन जोधपुर और तीन दिन जयपुर रहता हूं। मेरे पास राइसेम का अतिरिक्त प्रभार हैं इसलिए मैंने भू-जल निकालने के लिए गठित कमेटी का अध्यक्ष बनने से मना कर दिया।
-सोहनलाल लखानी, अतिरिक्त रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां), जोधपुर जोन
कोई विवाद नहीं है, पानी निकाल देंगे
कमेटी वगैरह आंतरिक मामला है। हम पानी वैसे ही निकाल देंगे। भू-तल के विकास के लिए जयपुर रजिस्ट्रार से राय मांगी गई है।
-प्रदीप जैन, अतिरिक्त रजिस्ट्रार (अपील)
Published on:
23 Dec 2017 01:20 pm
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