
water logging in Paota B Road under pass
करोड़ों रुपए खर्च कर बनाया गया जोधपुर का पावटा बी रोड अंडरपास की तकनीक शहर में आई एक तेज बारिश ने फेल कर दी है। अब इसके निर्माण पर ही सवाल उठने लगे हैं। पावटा बी रोड अंडरपास का निर्माण भू-जल की समस्या के साथ ही शुरू हुआ।
इस समस्या के निवारण के लिए ऐसी तकनीक विकसित की गई, जिससे बारिश का पानी अंडरपास में नहीं आ सके और भू-जल को भी बाहर निकाला जा सके, ताकि लोग बारिश में भी अंडरपास के नीचे होकर आसानी से निकल सकें। इसके बावजूद उद्घाटन के दो सालों के अंदर ही पावटा बी रोड अंडरपास बारिश के पानी और भू-जल दोनों समस्या से जूझ रहा है।
अब जेडीए को इसका कोई समाधान नहीं सूझ रहा है। ऐसे में अंडरपास के निर्माण में खर्च की गई करोड़ों की राशि बर्वाद नजर आने लगी है।
यह थी तकनीक
पावटा बी रोड अंडरपास के अंदर बारिश का पानी नहीं भरे, इसके लिए ब्रिज के दोनों तरफ शुरुआत में नाले का निर्माण कराया गया। इसके पानी की निकासी की व्यवस्था भी आगे तक की गई। वहीं भूजल को निकालने के लिए ब्रिज के अंदर मोटरें लगाई गई, भूजल को 30 मिनट से पौने घंटे तक दिन में तीन बार मोटर चलाकर सर्विस रोड के दोनों ओर नालियों में छोडऩे की योजना बनाई गई, ताकि भूजल ब्रिज के अंदर नहीं भरे।
यह हुआ हश्र
ब्रिज के शुरू होने के बाद से एक साल तक इसके रख-रखाव की जिम्मेदारी इरकॉन के पास रही। इस दौरान अंडरपास ठीक चलता रहा, हालांकि बीच-बीच में मोटर खराब होने पर अंडरपास में पानी भरने की समस्या आई, लेकिन जब से इसके रख-रखाव की जिम्मेदारी जोधपुर विकास प्राधिकरण के पास आई है, न तो मोटरों से समय पर पानी निकाला जा रहा है और न ही ब्रिज के अंदर कचरे की साफ-सफाई की जाती है।
फलस्वरूप ब्रिज के अंदर कचरा गया और पानी की मोटरें फेल हो गई और मंगलवार की बारिश के बाद अंडरपास में करीब छह फीट पानी भर गया।
फैक्ट फाइल
एमओयू तिथि : 05 जून 2012
कार्य प्रारंभ : 2 अक्टूबर 2012 (विरोध के चलते)
अंडरपास शुरू : 31 जुलाई 2014
प्रोजेक्ट की लागत : 15 करोड़
कार्य करने वाली एजेंसी : इरकॉन
कंपनी की रख-रखाव की जिम्मेदारी : जुलाई 2015 तक
Published on:
13 Aug 2016 01:59 am
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