
गांवों में पानी सप्लाई टैंकरों के भरोसे
जोधपुर.
प्रचंड गर्मी में पेयजल समस्या शहर और गांवों में परेशानी का कारण बनी हुई है। शहरों में पेयजल किल्लत होने पर जहां कई दिनों के बाद पेयजल आपूर्ति हुई है तो वहां गांवों में पेयजल सप्लाई का विकल्प टैंकर ले लेते हैं। शहर के आसपास के कई गांवों में एेसे ही हालात हैं। गर्मी में यहां टैंकर माफिया सक्रिय हो जाता है, जो मुंह मांगे दामों में पानी सप्लाई करता है।
एेसा ही एक गांव है शहर के निकट जाजीवाल जाखड़ा गांव। तीन हजार की आबादी वाला यह गांव कई मूलभूत सुविधाओं को तरस रहा है। पेयजल के लिए पानी तो सरकार देती है लेकिन इसका सप्लाई सिस्टम निजी लोगों के हाथों में है। हालात ये हैं कि घरों के टांकों में पानी पहुंचाने के लिए इन लोगों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है। पेयजल के साथ अन्य उपयोग का पानी लम्बे समय से टैंकरों के जरिये ही आ रहा है।
--
यह है पानी की समस्या
इस गांव में एक बड़ा जीएलआर और एक टांका बना हुआ है। यहां पानी दातीवाड़ा ओवरहैड टंकी से आता है। यहां बड़े जीएलआर के अलावा अन्य छोटे-छोटे चार जीएलआर भी बने हुए हैं, जो कई बार खाली ही रहते हैं। एेसे में गांव के कई हिस्सों में पानी नहीं पहुंच पाता है।
--
खाली पड़े जीएलआर के अवाले
लोग पेयजल के लिए तो टैंकर मंगवा लेते हैं, लेकिन जीएलआर के पास बने अवाले पिछले कई समय से खाली ही पड़े हैं। इसी कारण गांव के मवेशी और हिरण जैसे कई पशुओं को परेशानी हो रही है। इनके लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं है।
--
५०० रुपए तक एक टैंकर
इस गांव और आसपास के कई गांवों में पानी नहीं पहुंचने पर ग्रामीणों को टैंकरों का सहारा लेना पड़ता है। एक टैंकर संचालक ४०० से ५०० रुपए तक वसूल करता है। ग्रामीण भी यह राशि चुकाने के लिए मजबूर हैं। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पानी के ये टैंकर सरकारी पानी से ही भरे जाते हैं।
--
इनका कहना है
एेसा बिल्कुल नहीं है। जीएलआर में पानी पहुंचाने का प्रयास करते हैं। टांके से जीएलआर भरने के लिए मोटर लगा रखी है। एेसे में यह शिकायत झूठी है कि गांव में पानी नहीं पहुंचता।
- रामनारायण चौधरी, सहायक अभियंता, मंडोर
Published on:
11 Jun 2018 06:00 am
बड़ी खबरें
View Allजोधपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
