
पाक विस्थापित हिंदू परिवारों में ख़ुशी की लहर
जोधपुर। नागरिकता के लिए बरसों से इंतजार कर रहे हजारों पाकिस्तानी विस्थापित हिंदू परिवारों को अब तक कोरोना कवच नहीं मिल पा रहा था, लेकिन राजस्थान हाईकोर्ट की दखल से अब हजारों विस्थापित हिंदू परिवारों में उम्मीद की नई किरण जगी हैं।
वैक्सीनेशन के लिए आधार या पहचान कार्ड की अनिवार्यता कई लोगों के आड़े आई है। इनमें से साधु-संतों, भिखारी आदि बेघर लोगों, कैदियों, मानसिक विमंदित गृहों, वृद्धाश्रम और पुनर्वास केंद्रों में रहने वाले बिना पहचान पत्र वाले लोगों के टीकाकरण को केंद्र सरकार ने गत 6 मई को हरी झंडी दे दी, लेकिन विस्थापितों के लिए राज्य सरकार अब तक कोई फैसला नहीं ले पाई थी। राजस्थान पत्रिका ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। प्रदेश में लगभग 25 हजार पाक विस्थापित हैं। इनमें से 22 हजार 146 विस्थापित एलटीवी पर रह रहे हैं। इनमें से लगभग 90 फीसदी जोधपुर व आसपास के इलाकों में हैं। जोधपुर में अधिकांशत: कच्ची बस्तियों में रहने वाले करीब दस विस्थापित कोरोना से जान गंवा चुके हैं और पचास से ज्यादा संक्रमित हैं। विस्थापितों के हकों के लिए लम्बे समय से संघर्षरत सीमांत लोक संगठन के अध्यक्ष हिन्दूसिंह सोढ़ा ने ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा कि पासपोर्ट, रेजिडेंशियस परमिट या फिर लॉन्ग टर्म वीजा के आधार पर विस्थापितों के टीकाकरण के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। केंद्र सरकार से भी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून व प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में विस्थापितों को शामिल करने का अनुरोध किया गया था। हाईकोर्ट का आदेश इस वंचित वर्ग के लिए संजीवनी का काम करेगा।
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जयपुर फूट यूएसए ने किया स्वागत
पाक विस्थापितों को सुरक्षा का टीका लगने का रास्ता प्रशस्त होने पर जयपुर फूट यूएसए ने स्वागत किया है। चेयरमैन प्रेम भंडारी ने बताया कि इससे 20 हजार से अधिक लोगों के न सिर्फ वैक्सीनेशन का रास्ता खुला है, बल्कि उनके राशन की समस्या भी दूर होगी। उन्होंने पाक विस्थापितों के लिए संघर्ष कर रहे सीमांत लोक संगठन के अध्यक्ष हिंदूसिंह सोढ़ा की भी प्रशंसा की।
Published on:
28 May 2021 10:14 pm
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