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राहत इंदौरी ने कहा-शाइरी मोहब्बत की तरफ ले जाने का नाम है
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राहत इंदौरी ने कहा-शाइरी मोहब्बत की तरफ ले जाने का नाम है

जोधपुर. मिरी ख्वाहिश है कि आंगन में न दीवार उठे, मिरे भाई मिरे हिस्से की ज़मीं तू रख ले, जैसे खूबसूरत शेर कहने वाले विश्वप्रसिद्ध शाइर व बॉलीवुड के गीतकार राहत इंदौरी रविवार को जेट एयरवेज मुंबई की फ्लाइट से जोधपुर पहुंचे। उन्होंने जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में कहा कि शाइरीमोहब्बतों की तरफ ले जाने का नाम है।  
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जोधपुर

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MI Zahir

Mar 03, 2019

जोधपुर. उस की याद आई है सांसों जरा आहिस्ता चलो,धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ता है, जैसे खूबसूरत शेर कहने वाले विश्वप्रसिद्ध शाइर व बॉलीवुड के गीतकार राहत इंदौरी रविवार को जेट एयरवेज मुंबई की फ्लाइट से जोधपुर पहुंचे। उन्होंने जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में कहा कि शाइरी मोहब्बतों की तरफ ले जाने का नाम है। वे यहां एक कार्यक्रम में शिरकत करने के लिए जोधपुर आए हैं। गीतकार इंदौरी हिन्दी फिल्म खुद्दार, घातक, इश्क, मुन्ना भाई एमबीबीएस व जनम जैसी कई फिल्मों में खूबसूरत गीत दे चुके हैं।

मोहब्बत की बातें करने आया
उन्होंने एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में कहा कि शाइरी तो बुलंदियों और मोहब्बत की तरफ ले जाने का नाम है। हमारे मुल्क में हवाएं चल रही हैं जो माहौल है वो जंग का है, लेकिन मैं सिर्फ मोहब्बत की बातें करने आया हूं।

राहत इंदौरी के कुछ खूबसूरत शेर खास आपके लिए :
रोज पत्थर की हिमायत में गजल लिखते हैं

रोज शीशों से कोई काम निकल पड़ता है

मैं ने अपनी खुश्क आंखों से लहू छलका दिया
इक समुंदर कह रहा था मुझ को पानी चाहिए

शाखों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम
आंधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे

सूरज सितारे चाँद मिरे साथ में रहे

जब तक तुम्हारे हाथ मिरे हाथ में रहे
हम से पहले भी मुसाफिर कई गुजरे होंगे

कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते
एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो

दोस्ताना जिंदगी से मौत से यारी रखो
घर के बाहर ढूंढता रहता हूं दुनिया

घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है

मिरी ख्वाहिश है कि आंगन में न दीवार उठे
मिरे भाई मिरे हिस्से की जमीं तू रख ले

न हम-सफर न किसी हम-नशीं से निकलेगा
हमारे पांव का कांटा हमीं से निकलेगा

मैं परबतों से लड़ता रहा और चंद लोग
गीली जमीन खोद के फरहाद हो गए

अजीब लोग हैं मेरी तलाश में मुझको

वहां पर ढूंढ रहे हैं जहां नहीं हूं मैं

मैं आईनों से तो मायूस लौट आया था
मगर किसी ने बताया बहुत हसीं हूं मैं।

आंख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
जिंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो

तेरी हर बात मोहब्बत में गवारा कर के

दिल के बाजार में बैठे हैं खसारा कर के

मैं वो दरिया हूँ कि हर बूंद भंवर है जिसकी

तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा कर के।